बेटियों को जन्म देने वाले हर परिवार के लिए एक नया दौर शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने बेटी के जन्म पर आर्थिक सहायता का विशेष प्रावधान किया है, जिसमें शुरुआती मदद के साथ लंबे समय तक चलने वाला लाभ शामिल है। यह कदम न केवल परिवारों को मजबूत बनाता है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

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योजना का उद्देश्य और लाभ
सरकार का लक्ष्य बेटियों की शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करना है। बेटी के जन्म पर एक खास बॉन्ड जारी होता है, जिसका मूल्य समय के साथ बढ़ता रहता है। जन्म के तुरंत बाद मां को सहायता राशि बैंक खाते में भेजी जाती है। इसके बाद स्कूली पढ़ाई के हर पड़ाव पर अतिरिक्त धनराशि दी जाती है। पहले चरण में कक्षा छह पास करने पर एक राशि, फिर आठवीं, दसवीं और बारहवीं में क्रमशः बढ़ती हुई मदद मिलती है। कुल मिलाकर यह व्यवस्था बेटी के वयस्क होने तक एक मजबूत वित्तीय आधार तैयार कर देती है।
लाभ लेने की योग्यता
यह सहायता उन परिवारों के लिए है जिनकी सालाना कमाई एक निश्चित सीमा से कम हो। राज्य के मूल निवासियों को प्राथमिकता दी जाती है। परिवार गरीबी रेखा से नीचे होना चाहिए और बेटी का जन्म एक निर्धारित तारीख के बाद हुआ हो। प्रति परिवार अधिकतम दो बेटियों तक सीमित है। बेटी का पूरा टीकाकरण और वयस्क होने पर विवाह की उम्र का पालन जरूरी है। ये नियम सुनिश्चित करते हैं कि मदद सही हाथों तक पहुंचे।
जरूरी कागजात
आवेदन के समय कुछ बुनियादी दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं। माता-पिता की पहचान और निवास साबित करने वाले प्रमाण पत्र, पारिवारिक आय का विवरण, बेटी का जन्म प्रमाण पत्र जो सरकारी चिकित्सालय से जारी हो। बैंक खाते का ब्योरा और परिवार की तस्वीरें भी लगती हैं। स्थानीय केंद्र में नाम दर्ज कराने का प्रमाण भी आवश्यक होता है। सभी कागज पूरे रखने से प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ती है।
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आवेदन कैसे करें?
प्रक्रिया बहुत आसान रखी गई है। संबंधित विभाग की वेबसाइट पर जाकर फॉर्म ले लें। उसे भरें और दस्तावेज जोड़ें। नजदीकी सामुदायिक केंद्र या जिला स्तर के कार्यालय में जमा कर दें। जांच के बाद राशि सीधे खाते में आ जाती है। कई परिवारों ने पहले ही इसका फायदा उठाया है, जिससे बेटियों की पढ़ाई में सुधार आया है।
अन्य राज्यों की तुलना
कई राज्यों में बेटी केंद्रित पहलें चल रही हैं। कुछ जगहों पर जन्म के समय सीमित राशि मिलती है, जबकि विवाह के लिए अलग व्यवस्था है। लेकिन यह योजना जन्म से लेकर पढ़ाई तक का पूरा ख्याल रखती है, जो इसे अनूठा बनाती है। स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
यह पहल समाज के पुराने विचारों को चुनौती दे रही है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे बाल विवाह कम होंगे और लिंग अनुपात बेहतर होगा। सरकार आने वाले समय में इसे और व्यापक बनाने की योजना बना रही है। अगर आपका परिवार योग्य है, तो देर न करें। नजदीकी केंद्र से संपर्क कर बेटी के उज्ज्वल कल की शुरुआत करें।
















