
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है, मार्च 2026 में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) का घोषणापत्र जारी करते हुए ममता बनर्जी ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एनआरसी (NRC) और जनगणना के नाम पर आम नागरिकों की नागरिकता छीनने की बड़ी साजिश रच रही है।
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‘अघोषित राष्ट्रपति शासन’ का आरोप
ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान कड़े तेवर अपनाते हुए कहा कि बंगाल में वर्तमान में “अघोषित राष्ट्रपति शासन” जैसी स्थिति पैदा कर दी गई है, उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले कर राज्य में डर का माहौल बनाया जा रहा है, जो सीधे तौर पर भाजपा को फायदा पहुँचाने की कोशिश है।
मतदाता सूची से नाम हटाने का दावा
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि “विशेष गहन संशोधन” (SIR) की आड़ में मतुआ, राजबंशी और एक विशेष समुदाय के लोगों के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, उन्होंने जनता को आगाह किया कि चुनाव के तुरंत बाद जनगणना और एनआरसी की प्रक्रिया शुरू कर लोगों के नागरिक अधिकार खत्म करने की योजना है।
क्या हैं भारत में नागरिकता के मौजूदा नियम?
ममता बनर्जी के इन आरोपों के बीच देश में नागरिकता से जुड़े कानूनों को समझना जरूरी है, भारत में नागरिकता ‘नागरिकता अधिनियम 1955’ और ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2019’ के तहत तय होती है:
- नागरिकता प्राप्त करने के आधार: भारत में कोई भी व्यक्ति जन्म से, वंश के आधार पर, पंजीकरण (Registration) या प्राकृतिककरण (Naturalisation) के जरिए नागरिकता ले सकता है।
- CAA 2019 का प्रावधान: इस कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान है इनके लिए भारत में रहने की अनिवार्य अवधि को 11 साल से घटाकर 5-6 साल कर दिया गया है।
- नागरिकता कब छीनी जा सकती है? केंद्र सरकार किसी व्यक्ति की नागरिकता तभी रद्द कर सकती है यदि उसने धोखाधड़ी से दस्तावेज बनवाए हों, संविधान के प्रति अनादर दिखाया हो या युद्ध के समय दुश्मन देश की मदद की हो।
ममता बनर्जी का मुख्य तर्क यह है कि सीएए (CAA) के तहत आवेदन करने का अर्थ खुद को विदेशी स्वीकार करना है, जिससे भविष्य में लोगों की संपत्ति और कानूनी अधिकारों पर संकट आ सकता है।
















