
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को होली से पहले बड़ा तोहफा दिया है राज्य कैबिनेट ने ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2026’ को मंजूरी दे दी है, जो आगामी 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएंगे इस ऐतिहासिक फैसले से लगभग 4.60 लाख कार्यरत कर्मचारियों और उनके आश्रितों को सीधा लाभ पहुँचने की उम्मीद है।
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बेटियों के लिए ऐतिहासिक फैसला: उम्र की सीमा खत्म
नए नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव पारिवारिक पेंशन को लेकर किया गया है, अब कर्मचारी की तलाकशुदा, विधवा और अविवाहित बेटियों को आजीवन पेंशन का लाभ मिल सकेगा, सरकार ने 25 वर्ष की अनिवार्य आयु सीमा की शर्त को पूरी तरह हटा दिया है, जिससे सामाजिक सुरक्षा का दायरा और अधिक मजबूत हुआ है।
पेंशन और ग्रेच्युटी के नियमों में बड़े बदलाव
- यदि 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त किसी कर्मचारी की मृत्यु 10 वर्ष की सेवा पूरी करने से पहले हो जाती है, तो उनके परिजनों को अंतिम आहरित वेतन का एक-तिहाई (33%) हिस्सा पारिवारिक पेंशन के रुप में दिया जाएगा।
- कैबिनेट ने ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा (पेंशन का संराशीकरण) नियम, 2026’ और ‘डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी’ के नए प्रावधानों को भी हरी झंडी दी है।
- अब कर्मचारियों की ‘ई-सेवा पुस्तिका’ (e-Service Book) के आधार पर पेंशन का निर्धारण होगा, जिससे सेवानिवृत्ति के समय होने वाली कागजी देरी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
- पेंशन वितरण के लिए अब बैंकों और कोषालय के बीच सीधा इलेक्ट्रॉनिक डेटा साझा किया जाएगा, जिससे पेंशनर्स को बैंक के चक्कर नहीं काटने होंगे।
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पिछली सेवाओं की गणना का लाभ
नए नियमों के तहत, यदि कोई कर्मचारी केंद्र सरकार या अन्य राज्य सरकार से सेवा छोड़कर मप्र सरकार में शामिल हुआ है, तो उसकी पिछली सेवाओं को भी पेंशन की गणना के लिए जोड़ा जा सकेगा, इसके अतिरिक्त, यदि कोई कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद भी किसी जांच के अधीन है, तो उसे ‘अनंतिम पेंशन’ (Provisional Pension) देने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 1976 के पुराने नियमों को बदलकर 2026 के नए नियमों को लागू करना प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है, इससे न केवल कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी, बल्कि कर्मचारियों को उनके बुढ़ापे की सुरक्षा के प्रति अधिक आश्वस्त किया जा सकेगा।
















