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SEBI Big Decision: 44 म्यूचुअल फंड स्कीमें बंद, निवेशकों के पैसे का क्या होगा? जानें पूरा सच

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में पारदर्शिता और स्पष्टता लाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, सेबी ने 'सॉल्यूशन-ओरिएंटेड' (Solution-Oriented) कैटेगरी की सभी 44 स्कीमों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है, इस फैसले के बाद बच्चों के भविष्य और रिटायरमेंट के नाम पर चल रहे फंड्स के अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो गया है

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SEBI Big Decision: 44 म्यूचुअल फंड स्कीमें बंद, निवेशकों के पैसे का क्या होगा? जानें पूरा सच
SEBI Big Decision: 44 म्यूचुअल फंड स्कीमें बंद, निवेशकों के पैसे का क्या होगा? जानें पूरा सच

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में पारदर्शिता और स्पष्टता लाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, सेबी ने ‘सॉल्यूशन-ओरिएंटेड’ (Solution-Oriented) कैटेगरी की सभी 44 स्कीमों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है, इस फैसले के बाद बच्चों के भविष्य और रिटायरमेंट के नाम पर चल रहे फंड्स के अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो गया है।

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क्या है पूरा मामला?

सेबी के ताजा आदेश के अनुसार, अब म्यूचुअल फंड हाउस ‘बच्चों की शिक्षा’ या ‘रिटायरमेंट’ जैसे विशिष्ट लक्ष्यों के नाम पर अलग से योजनाएं नहीं चला पाएंगे 31 जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, बाजार में 29 रिटायरमेंट फंड और 15 चिल्ड्रेन फंड स्कीमें मौजूद थीं, जिन्हें अब बंद कर दिया गया है।

निवेशकों के पैसे का क्या होगा?

यदि आपने भी इन 44 स्कीमों में से किसी में निवेश किया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है आपका निवेश पूरी तरह सुरक्षित है:

  •  इन योजनाओं को अब समान रिस्क प्रोफाइल वाली अन्य हाइब्रिड या लाइफ-साइकिल स्कीमों में मर्ज कर दिया जाएगा।
  • इन 44 स्कीमों में अब कोई भी नया निवेशक पैसा नहीं डाल पाएगा। फ्रेश सब्सक्रिप्शन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
  •  निवेशकों की मौजूदा यूनिट्स को सेबी की अनुमति के बाद ही दूसरी स्कीमों में स्थानांतरित किया जाएगा।

‘लाइफ-साइकिल फंड’ की होगी एंट्री

सेबी ने इन स्कीमों को बंद करने के साथ ही ‘लाइफ-साइकिल फंड’ की एक नई और आधुनिक कैटेगरी पेश की है, यह फंड निवेशक की उम्र के साथ अपने आप एसेट एलोकेशन (इक्विटी और डेट का अनुपात) को बदल देगा, रेगुलेटर का मानना है कि पुराने ‘सॉल्यूशन-ओरिएंटेड’ फंड्स और सामान्य हाइब्रिड फंड्स में बहुत अधिक समानता थी, जिससे निवेशक भ्रमित हो रहे थे।

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फंड हाउसों को मिला 6 महीने का समय

सेबी ने सभी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को इस बदलाव को लागू करने के लिए 6 महीने की मोहलत दी है साथ ही, अब कोई भी दो स्कीमों के बीच पोर्टफोलियो ओवरलैप 50% से अधिक नहीं हो सकेगा, जिससे निवेशकों को अधिक विविध विकल्प मिल सकेंगे।

यह फैसला निवेशकों के हितों की सुरक्षा और म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में डुप्लीकेसी को खत्म करने के लिए लिया गया है, विशेषज्ञों का कहना है कि इससे निवेशकों को अधिक तर्कसंगत और बेहतर रिटर्न देने वाले विकल्प मिलेंगे।

SEBI Big Decision
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info@nitap.in

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