
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद लगाए जनता को शहबाज शरीफ सरकार ने एक बार फिर करारा झटका दे दिया है। 15 फरवरी आधी रात से लागू नए रेट्स के तहत पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹7.32 प्रति लीटर महंगे हो गए। अब पाकिस्तान में पेट्रोल ₹258.17 और डीजल ₹253.17 प्रति लीटर पर पहुंच गया है। यह वृद्धि एक महीने में दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है, क्योंकि फरवरी की शुरुआत में ही दाम 11 रुपये से ज्यादा ऊंचे किए गए थे। आगामी रमजान के महीने में यह फैसला आम लोगों के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है।
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क्या कहते हैं आंकड़े?
पाकिस्तान में ईंधन दरें हर दो हफ्ते में समीक्षा होती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, एक्सचेंज रेट और घरेलू टैक्स पर निर्भर करती हैं। हाई-स्पीड डीजल (HSD) पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है, जो ट्रांसपोर्ट, कृषि और बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार के इस फैसले से न केवल वाहन मालिक परेशान हैं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। पिछले एक साल में ईंधन कीमतें 40% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं, जो आर्थिक संकट से जूझ रहे देश की जनता के लिए भारी बोझ है।
तुलनात्मक विवरण देखें तो जनवरी के अंत में पेट्रोल ₹253 और डीजल ₹245 के आसपास था। अबकी बढ़ोतरी से कुल खपत पर प्रति व्यक्ति ₹500-700 मासिक अतिरिक्त खर्च आ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैश्विक क्रूड ऑयल $80 प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने और पाकिस्तानी रुपये की गिरती वैल्यू का नतीजा है।
आम आदमी पर सीधा असर
लोअर-मिडिल क्लास को सबसे ज्यादा चोट पहुंच रही है। रिक्शा चालक, टू-व्हीलर यूजर्स और छोटी गाड़ियों के मालिक रोजाना आने-जाने के लिए पेट्रोल पर निर्भर हैं। एक औसत परिवार, जो मासिक 50 लीटर पेट्रोल इस्तेमाल करता है, अब ₹250 अतिरिक्त चुकाएगा। डीजल महंगा होने से ट्रक, बस और किसानों के ट्रैक्टर्स प्रभावित हो रहे हैं, जिसका असर सब्जी, अनाज और दूध जैसी जरूरी चीजों के दामों पर पड़ रहा है। अनुमान है कि महंगाई दर 2-3% और चढ़ जाएगी।
ग्रामीण इलाकों में स्थिति और खराब है। जहां डीजल पर निर्भर खेती पहले ही महंगी हो चुकी, वहां अब बिजली उत्पादन भी महंगा पड़ रहा। एक किसान ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ट्रैक्टर भरने का खर्च दोगुना हो गया, फसलें बेचकर भी घाटा ही हो रहा।” शहरी क्षेत्रों में टैक्सी ड्राइवरों का किराया बढ़ाने को मजबूर होना पड़ रहा है, जो यात्रियों के लिए नया बोझ है।
सरकार का तर्क और जनता का गुस्सा
सरकार का कहना है कि यह बढ़ोतरी IMF लोन शर्तों और सब्सिडी घटाने का नतीजा है। लेकिन विपक्ष इसे “जन-विरोधी नीति” बता रहा। सोशल मीडिया पर #FuelHikeProtest ट्रेंड कर रहा, जहां लोग रमजान से पहले राहत की मांग कर रहे। आर्थिक विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे कि लंबे समय तक यह चलता रहा तो गरीबी रेखा नीचे आबादी और बढ़ेगी।
भविष्य में क्या? बचाव के रास्ते
वैश्विक तेल कीमतें स्थिर न हुईं तो अगली समीक्षा में और बढ़ोतरी संभव। जनता को सलाह है: कारपूलिंग अपनाएं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करें या CNG वाहनों पर स्विच करें। सरकार को सब्सिडी बढ़ाने या टैक्स कम करने की जरूरत है। फिलहाल, पाकिस्तान की जनता महंगाई के इस तूफान से जूझ रही है।
















