बिहार सरकार ने पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन स्थापना के नियमों को काफी हद तक आसान बना दिया है। पहले जटिल शर्तों के कारण छोटे निवेशक इस क्षेत्र से दूर रहते थे, लेकिन अब न्यूनतम जमीन की जरूरत घटाकर 400 वर्ग मीटर कर दी गई है। यह बदलाव राज्य के शहरी व ग्रामीण इलाकों में नई संभावनाएं खोलेगा, रोजगार बढ़ाएगा और स्वच्छ ईंधन को प्रोत्साहन देगा।

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मुख्य बदलाव जो बदलेगी तस्वीर
अब शहरी इलाकों में 20 गुणा 20 मीटर का प्लॉट ही काफी है, जबकि पहले इससे कहीं ज्यादा जगह चाहिए होती थी। ग्रामीण सड़कों पर बायोडीजल पंप खोलने का रास्ता भी साफ हो गया। प्रवेश द्वार की चौड़ाई 7.5 मीटर और बफर जोन 5 मीटर रखना अनिवार्य होगा, ताकि सुरक्षा बरकरार रहे। राज्य सरकार 650 नए सीएनजी स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। ये कदम किसानों को बायो ईंधन उत्पादन से जोड़ेगा और प्रदूषण घटाने में मदद करेगा।
आवेदन कैसे करें?
प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। पहले अपनी जमीन चिह्नित करें, चाहे शहर हो या गांव। स्थानीय नगर निगम या पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र लें। फिर प्रमुख तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम या हिंदुस्तान पेट्रोलियम की वेबसाइट पर ऑनलाइन फॉर्म भरें। सीएनजी के लिए गैस वितरण कंपनियों से साझेदारी करें।
आवश्यक कागजातों में जमीन के दस्तावेज, अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र, पर्यावरण स्वीकृति और साइट का नक्शा शामिल हैं। कुल खर्च 50 लाख से दो करोड़ रुपये तक आ सकता है, जो जगह व सुविधाओं पर निर्भर करता है। आवेदन जमा होने पर साइट का निरीक्षण होता है, जो आमतौर पर तीन से छह माह में पूरा हो जाता है। महिलाओं और पिछड़े वर्गों के लिए विशेष छूट व आरक्षण का प्रावधान है।
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आर्थिक लाभ व भविष्य की संभावनाएं
ये नीतियां बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी। छोटे प्लॉट से स्टेशन शुरू होने पर ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत खुलेंगे। सीएनजी का विस्तार वाहनों के उत्सर्जन को कम करेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण होगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूर्व अनुमति की बाध्यता भी हटा दी गई। हालांकि, स्थानीय विवादों या सुरक्षा जांच से बचने के लिए विशेषज्ञ सलाह लें।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह कदम स्वदेशी ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा प्रयास है। पहले यह क्षेत्र बड़े व्यापारियों तक सीमित था, अब मध्यम वर्ग के लोग भी आगे आ सकेंगे। अगले दो सालों में 1000 स्टेशन खुलने की उम्मीद है, जो हजारों नौकरियां पैदा करेगा। उद्यमी पारदर्शिता व तेज प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं।
चुनौतियां व सुझाव
कुछ चुनौतियां जैसे जमीन विवाद या तकनीकी मंजूरी में देरी बनी रह सकती हैं। इसलिए कानूनी सलाहकार या भूमि सर्वेक्षक की मदद लें। ग्रामीण बायोफ्यूल पंप किसानों के लिए लाभदायक साबित होंगे, क्योंकि वे अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे। कुल मिलाकर यह नीति बिहार को ऊर्जा हब बनाने की ओर ले जाएगी। इच्छुक निवेशक तुरंत तैयारी शुरू कर दें, अवसर हाथ से न निकले।
















