
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने शेयर बाजार से जुड़े ब्रोकर्स और कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज के लिए फंडिंग नियमों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। 13 फरवरी को जारी नए सर्कुलर के तहत 1 अप्रैल 2026 से सभी ब्रोकर फंडिंग 100% सिक्योर्ड होनी अनिवार्य होगी। बैंक गारंटी पर 50% कोलैटरल (जिसमें 25% कैश) जरूरी होगा, इक्विटी शेयरों पर 40% हेयरकट लगेगा और प्रॉप ट्रेडिंग के लिए बैंक फंडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा। लगातार कोलैटरल मॉनिटरिंग और मार्जिन कॉल भी बाध्यकारी होंगे। इन बदलावों ने बाजार को हिला दिया- 16 फरवरी को BSE, Angel One जैसे शेयर 2-10% लुढ़क गए।
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RBI के नए नियमों का उद्देश्य
RBI का ‘कमर्शियल बैंक – क्रेडिट फैसिलिटीज अमेंडमेंट डायरेक्शंस, 2026’ सट्टेबाजी रोकने, वित्तीय स्थिरता बढ़ाने और बैंकों को बाजार अस्थिरता से बचाने पर केंद्रित है। पहले ब्रोकर्स बैंक गारंटी के लिए आंशिक अनसिक्योर्ड गारंटी (जैसे प्रमोटर गारंटी) पर निर्भर थे, लेकिन अब पूरी फंडिंग ठोस एसेट्स- कैश, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज, प्रॉपर्टी- से बैक होनी होगी। Jefferies की रिपोर्ट में कहा गया कि BSE की कमाई पर 10% असर पड़ सकता है। HDFC सिक्योरिटीज के देवर्ष वकील ने चेतावनी दी कि ट्रेडिंग महंगी होगी, खासकर डेरिवेटिव्स में जहां 40% प्रॉप ट्रेडिंग होती है।
नए नियमों का पूरा खुलासा
सवाल 1: RBI ने ठीक क्या बदला?
जवाब: ब्रोकर्स को अब 100% सिक्योर्ड फंडिंग रखनी होगी। पहले 100 रुपये की गारंटी के लिए 50 रुपये FD और बाकी अनसिक्योर्ड से चल जाता था। अब कोई ढील नहीं- पूरी वैल्यू पर कोलैटरल जरूरी।
सवाल 2: बैंक गारंटी के नए नियम?
जवाब: एक्सचेंज या क्लियरिंग हाउस के पक्ष में गारंटी पर कम से कम 50% कोलैटरल, जिसमें 25% कैश। इससे ब्रोकर्स को ज्यादा नकदी ब्लॉक करनी पड़ेगी।
सवाल 3: इक्विटी पर 40% हेयरकट का मतलब?
जवाब: 100 रुपये के शेयर पर बैंक सिर्फ 60 रुपये मानेंगे। ब्रोकर्स को दोगुना कोलैटरल जुटाना होगा, लीवरेज घटेगा।
सवाल 4: प्रॉप ट्रेडिंग पर रोक क्यों?
जवाब: बैंकों से खुद की ट्रेडिंग के लिए फंडिंग बंद। अपवाद सिर्फ मार्केट मेकिंग या डेट वेयरहाउसिंग। इससे सट्टेबाजी रुकेगी।
सवाल 5: ‘कैपिटल मार्केट एक्सपोजर’ क्या है?
जवाब: सभी ब्रोकर लोन अब इस कैटेगरी में आएंगे, बैंकों की लेंडिंग लिमिट प्रभावित होगी। सतर्कता बढ़ेगी।
सवाल 6: कोलैटरल मॉनिटरिंग कैसे?
जवाब: रीयल-टाइम वैल्यू चेक, कमी पर तत्काल मार्जिन कॉल। रिस्क मैनेजमेंट मजबूत होगा।
सवाल 7: आम निवेशकों पर असर?
जवाब: ब्रोकरेज चार्ज, मार्जिन बढ़ सकते हैं। छोटे ब्रोकर्स दबाव में, बड़े फायदे में। लॉन्ग-टर्म में सिस्टम सुरक्षित, लेकिन शॉर्ट-टर्म में लागत वृद्धि।
ब्रोकर्स और बाजार पर गहरा प्रभाव
छोटे ब्रोकर्स पर सबसे ज्यादा बोझ- कैपिटल ब्लॉकेज से लिक्विडिटी सूखेगी। बड़े खिलाड़ी मजबूत बैलेंस शीट से टिकेंगे। बाजार अनुशासित बनेगा, लेकिन वॉल्यूम घट सकता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि RBI का फोकस सिस्टमिक रिस्क कम करना है, जो 2020-21 जैसे क्रैश से सबक लेता है। PDF डिटेल्स के लिए RBI साइट देखें।
















