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LLB अब 5 नहीं, 4 साल में होगी पूरी? 12वीं के बाद वकालत की पढ़ाई में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

 भारत में कानून की पढ़ाई (LLB) करने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है, सुप्रीम कोर्ट 12वीं के बाद होने वाले 5 साल के इंटीग्रेटेड एलएलबी कोर्स की अवधि को घटाकर 4 साल करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है, चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले को अप्रैल 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है

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LLB अब 5 नहीं, 4 साल में होगी पूरी? 12वीं के बाद वकालत की पढ़ाई में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
LLB अब 5 नहीं, 4 साल में होगी पूरी? 12वीं के बाद वकालत की पढ़ाई में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई

 भारत में कानून की पढ़ाई (LLB) करने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है, सुप्रीम कोर्ट 12वीं के बाद होने वाले 5 साल के इंटीग्रेटेड एलएलबी कोर्स की अवधि को घटाकर 4 साल करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है, चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले को अप्रैल 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है। 

यह भी देखें: वर्किंग महिलाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला! 12 सप्ताह के मातृत्व अवकाश पर सरकार को दी बड़ी नसीहत

क्यों हो रही है 4 साल के कोर्स की मांग?

यह जनहित याचिका (PIL) वरिष्ठ अधिवक्ता और याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई है। याचिका में निम्नलिखित मुख्य तर्क दिए गए हैं: 

  • नई शिक्षा नीति (NEP 2020): याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 सभी पेशेवर पाठ्यक्रमों के लिए 4 साल की स्नातक डिग्री की सिफारिश करती है। चूंकि कानून भी एक पेशेवर कोर्स है, इसलिए इसे 5 साल तक खींचना नीति के खिलाफ है।
  • समय और पैसे की बर्बादी: वर्तमान 5 वर्षीय कोर्स को ‘बेकार’ और ‘खर्चीला’ बताया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इसमें कई ऐसे विषय पढ़ाए जा रहे हैं जिनका वास्तविक वकालत से कोई लेना-देना नहीं है, जिससे छात्रों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ता है।
  • अंतरराष्ट्रीय मानक: दुनिया के कई विकसित देशों (जैसे अमेरिका और यूके) में वकालत की पढ़ाई 4 साल या उससे कम समय में पूरी हो जाती है, जबकि भारत में 12वीं के बाद इसमें 5 साल लगते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

सोमवार, 16 मार्च 2026 को हुई शुरुआती सुनवाई के दौरान पीठ ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका कानूनी शिक्षा से जुड़े मामलों पर अपने विचार नहीं थोप सकती, बेंच का मानना है कि इस तरह के नीतिगत बदलावों के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI), विश्वविद्यालयों और शिक्षाविदों जैसे सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श की जरुरत है। 

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मांग: ‘विधि शिक्षा आयोग’ का हो गठन

याचिका में केंद्र सरकार को एक ‘विधि शिक्षा आयोग’ (Legal Education Commission) बनाने का निर्देश देने की भी मांग की गई है, इस प्रस्तावित आयोग में प्रख्यात न्यायविदों, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और प्रोफेसरों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है, जो एलएलबी और एलएलएम के पाठ्यक्रम और अवधि की समीक्षा कर सकें। 

वर्तमान में, 12वीं के बाद छात्र 5 साल के बीए-एलएलबी या बीबीए-एलएलबी जैसे कोर्स करते हैं, यदि सुप्रीम कोर्ट याचिका के पक्ष में फैसला सुनाता है, तो भारत में कानूनी शिक्षा की संरचना में यह एक ऐतिहासिक बदलाव होगा। 

SC to Hear Pil on Reducing 5Year LLB Course to 4 Years
Author
info@nitap.in

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