
बैंकिंग सेक्टर से आज की सबसे बड़ी खबर IDBI बैंक को लेकर आ रही है, लंबे समय से चल रही निजीकरण (Privatization) की प्रक्रिया पर सरकार द्वारा बड़ा फैसला लेते हुए इसे फिलहाल रोकने या वापस लेने के संकेत मिले हैं, इस खबर के बाहर आते ही शेयर बाजार में हड़कंप मच गया और IDBI बैंक के शेयरों में 14% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई।
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क्यों आई शेयरों में सुनामी?
निवेशकों के बीच IDBI बैंक को लेकर सबसे बड़ा आकर्षण इसके निजीकरण की प्रक्रिया थी, केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर बैंक में अपनी करीब 60.72% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में थे। सोमवार को बाजार खुलते ही यह खबर फैल गई कि सरकार ने इस विनिवेश (Divestment) प्रक्रिया को रद्द करने का मन बना लिया है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा गया और भारी बिकवाली शुरू हो गई।
निजीकरण का फैसला वापस लेने की मुख्य वजह
सूत्रों के मुताबिक, इस रणनीतिक बिक्री को रोकने के पीछे मुख्य कारण ‘रिजर्व प्राइस’ (न्यूनतम निर्धारित मूल्य) का मुद्दा है। बताया जा रहा है कि:
- कम बोलियां: संभावित खरीदारों (बिडर्स) द्वारा लगाई गई वित्तीय बोलियां सरकार द्वारा तय किए गए रिजर्व प्राइस से काफी कम थीं।
- सरकारी मूल्यांकन: सरकार कम कीमत पर अपनी हिस्सेदारी बेचने के पक्ष में नहीं है, जिसके कारण पूरी प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डालने का निर्णय लिया गया है।
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निवेशकों को भारी चपत
कारोबारी सत्र के दौरान IDBI बैंक का शेयर ₹78 के स्तर तक गोता लगा गया विशेषज्ञों का मानना है कि निजीकरण की उम्मीद में जिन निवेशकों ने ऊंचे भाव पर खरीदारी की थी, उन्हें इस फैसले से तगड़ा झटका लगा है।
अब आगे क्या?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार भविष्य में नए सिरे से बोलियां आमंत्रित करेगी या बैंक को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB) के रुप में ही जारी रखेगी, इस फैसले का असर न केवल IDBI बैंक, बल्कि अन्य सरकारी बैंकों के विनिवेश की योजनाओं पर भी पड़ सकता है।
















