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Social Media Rules: अब लॉगआउट नियम में नहीं मिलेगी ढील, सरकार का बड़ा एक्शन

सरकार ने सोशल मीडिया ऐप्स पर लॉगआउट नियमों में कोई ढील नहीं दी। SIM निष्क्रिय होने पर 6 घंटे में ऑटो-लॉगआउट अनिवार्य, एक्सटेंशन नहीं। TRAI की स्पेक्ट्रम सिफारिशें जारी, DoT नीलामी की तैयारी में। IBC कंपनियों से स्पेक्ट्रम वापसी का संकेत। डेटा सुरक्षा और राजस्व के लिए दोहरा एक्शन।

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Social Media Rules: अब लॉगआउट नियम में नहीं मिलेगी ढील, सरकार का बड़ा एक्शन

डिजिटल इंडिया की तेज रफ्तार में सरकार दो मोर्चों पर एक साथ एक्शन मोड में उतर आई है। एक ओर सोशल मीडिया ऐप्स के लिए लॉगआउट नियमों में कोई ढील नहीं, दूसरी ओर टेलीकॉम स्पेक्ट्रम को राष्ट्रीय संपत्ति मानते हुए कड़ा रुख। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को जारी निर्देशों में एक्सटेंशन देने के मूड में बिल्कुल नहीं है। लॉगआउट नियम में भी किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी, जिससे WhatsApp, Telegram जैसे ऐप्स पर दबाव बढ़ गया है।​

दोहरी रणनीति का खुलासा

उधर, टेलीकॉम सेक्टर में TRAI ने स्पेक्ट्रम संबंधी सिफारिशें जारी कर दी हैं। DoT जल्द अगला कदम उठाएगा, जिसमें नीलामी की तारीख, उपलब्ध बैंड और रिजर्व प्राइस तय होगा। स्पेक्ट्रम को अब ‘रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति’ का दर्जा दिया जा रहा है, क्योंकि यह 5G-6G नेटवर्क की रीढ़ है और सरकार के लिए प्रमुख राजस्व स्रोत। IBC (Insolvency and Bankruptcy Code) में फंसी कंपनियों से स्पेक्ट्रम वापस लेने की तैयारी भी जोरों पर है, अगर उनका उपयोग न हो या देनदारियां न चुका पाएं।​

सोशल मीडिया पर क्या तय हुआ?

सूत्र बताते हैं कि SIM कार्ड निष्क्रिय या ब्लॉक होने पर ऐप्स को 6 घंटे के अंदर यूजर को ऑटो-लॉगआउट करना अनिवार्य होगा। यह SIM बाइंडिंग का हिस्सा है, जो फेक अकाउंट्स और फ्रॉड रोकने के लिए लाया गया। प्लेटफॉर्म्स को 120 दिनों में यह सुविधा लागू करनी होगी, वरना फाइन या अन्य दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, IT Rules 2021 के संशोधन से अवैध कंटेंट हटाने की समय सीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। AI-जनरेटेड कंटेंट पर लेबलिंग जरूरी, गैर-सहमति वाली तस्वीरों के लिए 2 घंटे की डेडलाइन। 20 फरवरी 2026 से ये नियम लागू हो चुके हैं।

सरकार की सख्ती क्यों?

जवाब तीन शब्दों में: डेटा, डिजिटल कंट्रोल, राष्ट्रीय संपत्ति। सोशल मीडिया अब सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि डेटा खदान, विज्ञापन इंजन और इन्फ्लुएंस का हथियार बन चुका है। फेक न्यूज, डीपफेक और साइबर खतरे बढ़ने से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में है। पब्लिक कंसल्टेशन के बाद ये कदम उठाए गए, जिसमें टेक्निकल और सुरक्षा इनपुट लिए गए। लक्ष्य स्पष्ट: डेटा दुरुपयोग रोकना, फेक नैरेटिव्स पर लगाम, राजस्व लीक बंद करना। सरकार का संदेश साफ है- “नियम सब पर समान, चाहे Meta हो या टेलीकॉम जायंट्स।”

स्पेक्ट्रम पर TRAI-DoT की रणनीति

TRAI की सिफारिशें स्पेक्ट्रम नीलामी को गति देंगी। प्रश्न वही हैं- कब ऑक्शन? कितना स्पेक्ट्रम? कौन से बैंड (जैसे 700 MHz, mmWave)? रिजर्व प्राइस क्या? IBC वाली कंपनियों (जैसे वोडाफोन आइडिया के कुछ मामलों में) से बर्खास्तगी का संकेत मिला है। स्पेक्ट्रम निजी मिल्कियत नहीं, बल्कि सार्वजनिक संसाधन है। इससे टेलीकॉम कंपनियों को निवेश के नए अवसर मिलेंगे, लेकिन अनुपालन सख्त होगा।​

प्रभाव और भविष्य

प्लेटफॉर्म्स को तकनीकी अपग्रेड करना पड़ेगा- AI मॉडरेशन, रीयल-टाइम मॉनिटरिंग। यूजर्स के लिए डेटा प्राइवेसी मजबूत होगी, लेकिन लॉगिन आदतें बदलेंगी। कंटेंट क्रिएटर्स को AI लेबलिंग का पालन करना होगा। टेलीकॉम में नई नीलामी से शेयर मार्केट में हलचल संभव। निवेशकों को सेक्टरल शिफ्ट पर नजर रखनी चाहिए।

आपके लिए मतलब

सोशल मीडिया यूजर, क्रिएटर या बिजनेस ओनर हैं? प्लेटफॉर्म पॉलिसी बदलेंगी, डेटा नियम सख्त होंगे। टेलीकॉम निवेशक? नीलामी से बाजार गतिशील बनेगा। बॉटमलाइन: अनुपालन अनिवार्य, राष्ट्रीय संसाधन सर्वोपरि। यह डिजिटल गवर्नेंस का नया अध्याय है, जो आने वाले महीनों में सेक्टर को नया आकार देगा। 

Author
info@nitap.in

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