
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है, लंबे समय से कृषि भूमि के उत्तराधिकार में भेदभाव का सामना कर रही बेटियों के लिए अब अच्छी खबर है, प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (UP Revenue Code) में संशोधन करने की तैयारी में है, जिससे विवाहित बेटियों को भी अपने पिता की पैतृक कृषि संपत्ति में बेटों के समान अधिकार मिल सकेगा।
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खत्म होगी ‘अविवाहित’ शब्द की बाधा
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 108(2) के तहत पिता की कृषि भूमि पर मुख्य रूप से बेटों, विधवा पत्नी और केवल अविवाहित बेटियों का ही हक होता है, शादी होने के बाद बेटी को उत्तराधिकार की प्राथमिकता सूची से बाहर कर दिया जाता है।
प्रस्तावित नए बदलाव के तहत, कानून से ‘अविवाहित’ शब्द को हटा दिया जाएगा, इसका सीधा मतलब यह है कि बेटी चाहे विवाहित हो या अविवाहित, पिता की जमीन पर उसका अधिकार उतना ही होगा जितना कि उसके भाइयों का।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
- हालांकि ‘हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 2005’ बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार देता है, लेकिन यूपी में कृषि भूमि के मामले में पुराने राजस्व नियम आड़े आ रहे थे। इस संशोधन से यह कानूनी विसंगति दूर हो जाएगी।
- हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि कृषि भूमि के उत्तराधिकार में लैंगिक आधार पर भेदभाव करना संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
- मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में पहले से ही बेटियों को कृषि भूमि में समान अधिकार प्राप्त हैं। यूपी भी अब इसी राह पर चलने को तैयार है।
बेटियों के जीवन पर क्या होगा असर?
राजस्व परिषद द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, इस कानून के लागू होने के बाद:
- ग्रामीण इलाकों में बेटियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
- जमीन से जुड़े विवादों में कमी आएगी और बेटियों को सम्मानजनक हक मिलेगा।
- महिलाएं कृषि ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अपनी हिस्सेदारी का उपयोग कर सकेंगी।
















