
देश में डिजिटल पेमेंट का क्रांति यूपीआई ने ही लाई है। पहले लोग हर छोटे-मोटे खरीद के लिए कैश निकालने को मजबूर थे, लेकिन अब किराना दुकान से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक सब यूपीआई से हो जाता है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में यूपीआई ने 28 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड ट्रांजेक्शन पार किए। यह आसान, तेज और सुरक्षित तरीका लाखों यूजर्स की पहली पसंद बन चुका है।
लेकिन हाल ही सोशल मीडिया पर एक वायरल खबर ने सबको हैरान कर दिया – “अब हर यूपीआई ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगेगा!” क्यूआर कोड स्कैन करने से पहले लोग दोबारा सोचने लगे हैं। क्या यह सच है? RBI और सरकार के ताजा नियमों से समझते हैं पूरी सच्चाई।
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सोशल मीडिया पर वायरल दावा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप पर वीडियो और पोस्ट तेजी से फैल रहे हैं। इनमें दावा किया जा रहा है कि RBI ने 2026 से 6 नए नियम लागू कर दिए हैं, जिसमें हर यूपीआई पेमेंट पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) या सर्विस चार्ज लगेगा। कुछ वीडियो तो ₹1 लाख दैनिक लिमिट के साथ चार्जेस का जिक्र कर रहे हैं। लेकिन RBI और NPCI ने साफ कर दिया है – आम यूजर्स (व्यक्तिगत P2P ट्रांजेक्शन) के लिए यूपीआई पूरी तरह फ्री रहेगा। वित्त मंत्रालय ने भी इन फर्जी दावों का खंडन किया है। कोई नया नियम यूजर्स पर सीधा बोझ नहीं डालता।
RBI के नए नियम
RBI ने जनवरी 2026 से पेमेंट एग्रीगेटर्स (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। मुख्य फोकस सुरक्षा, अनुपालन और फ्रॉड रोकने पर है।
- ट्रांजेक्शन लिमिट: सामान्य दैनिक लिमिट ₹1 लाख बरकरार। मेडिकल, एजुकेशन, टैक्स और इंश्योरेंस जैसी कैटेगरी में ₹5 लाख तक की अनुमति। नए यूजर्स के लिए पहले 24 घंटे में सख्त लिमिट (₹5,000) फ्रॉड रोकने के लिए।
- सुरक्षा अपग्रेड: अप्रैल 2026 से अनिवार्य 2FA (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) जिसमें बायोमेट्रिक या डायनामिक PIN शामिल। ऑटो-डेबिट टाइमिंग सीमित और हर ट्रांजेक्शन के बाद बैलेंस डिस्प्ले।
- मर्चेंट्स पर असर: वॉलेट-बेस्ड या क्रेडिट लिंक्ड UPI पर मर्चेंट्स को 0.5%-1.1% इंटरचेंज फीस देनी पड़ सकती है, लेकिन कस्टमर को नहीं। छोटे दुकानदार सुरक्षित, बड़े मर्चेंट्स पर MDR मॉडल। GST थ्रेशोल्ड (गुड्स ₹40 लाख, सर्विस ₹20 लाख) पार करने पर KYC जरूरी।
ये बदलाव 28 फरवरी 2026 तक पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए हैं। क्रॉस-बॉर्डर लिमिट ₹25 लाख तक सीमित।
डिजिटल पेमेंट को बूस्ट
केंद्र सरकार ने बजट में यूपीआई और RuPay कार्ड ट्रांजेक्शन के लिए ₹2000 करोड़ की सब्सिडी का प्रावधान किया। यह मर्चेंट्स पर पड़ने वाले MDR बोझ को कम करेगा। छोटे व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाले बेफिक्र रहें – डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने की नीति में कोई बदलाव नहीं। यूपीआई टैक्स-फ्री और फ्री बना रहेगा।
यूजर्स के लिए सलाह
- KYC अपडेट रखें, फिशिंग से बचें।
- ऐप्स जैसे PhonePe, GPay पर लेटेस्ट वर्जन यूज करें।
- हाई-वैल्यू पेमेंट के लिए वेरिफाइड मर्चेंट चुनें।
निष्कर्षतः, यूपीआई चार्ज की खबर महज अफवाह है। यह डिजिटल पेमेंट को और मजबूत बनाने की दिशा में कदम है। बेफिक्र होकर क्यूआर स्कैन करें- कैशलेस इंडिया का सफर जारी रहेगा।
















