मध्य पूर्व के तनावपूर्ण हालातों में ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने प्रमुख सैन्य अड्डों के उपयोग की अनुमति दे दी है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व वाली सरकार का यह निर्णय ईरान को भड़का चुका है, जो अब ब्रिटिश नागरिकों पर हमले की चेतावनी दे रहा है और इसे तीसरे विश्वयुद्ध का संकेत बता रहा है।

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ब्रिटेन का बड़ा कदम
ब्रिटिश कैबिनेट की हालिया बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। अमेरिका अब आरएएफ फेअरफोर्ड और डिएगो गार्सिया जैसे ठिकानों से संचालन कर सकेगा। सरकारी बयान में इसे रक्षात्मक उपाय बताया गया है, जिसका मकसद ईरान के मिसाइल हमलों से होर्मुज जलसंधि में शिपिंग को सुरक्षित रखना है। ब्रिटेन का कहना है कि यह कदम न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी बचाएगा। विपक्ष ने हालांकि इसे अमेरिकी नीतियों में उलझने का आरोप लगाया है।
ईरान का आक्रामक रुख
तेहरान ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। ईरानी अधिकारियों ने ब्रिटेन को फोन पर चेताया कि इससे उसके लोग खतरे में पड़ जाएंगे। ईरान ने ब्रिटेन को अमेरिकी अभियानों का प्रत्यक्ष साथी घोषित किया और कहा कि अब कोई संयम नहीं बरता जाएगा। फरवरी से चले आ रहे संघर्ष में ईरान ने जहाजों पर मिसाइलें दागी हैं, जिसके जवाब में यह नया मोड़ आया। ईरान की ओर से विश्वयुद्ध की बात अतिशयोक्ति भले लगे, लेकिन तनाव चरम पर पहुंच चुका है।
वैश्विक प्रभाव और पृष्ठभूमि
यह घटना फरवरी के अंत से तेज हुए संघर्ष का हिस्सा है। शुरुआत में ब्रिटेन ने अनुमति से इनकार किया था, लेकिन हाल के हमलों ने स्थिति बदल दी। अमेरिकी बी-52 विमानों की तैनाती की खबरें सामने आ रही हैं। तेल कीमतों में तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था डगमगा रही है। भारत जैसे आयातक देशों में ईंधन महंगा होने का डर है, जिसके चलते नौसेना को सतर्क किया गया है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त नीति ने सहयोगियों को बाध्य किया है। ईरान अगर जवाबी कार्रवाई करता है, तो परिस्थितियां बेकाबू हो सकती हैं। फिलहाल सभी पक्ष संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, लेकिन मध्य पूर्व का भविष्य अनिश्चित नजर आता है। आने वाले घंटे निर्णायक साबित होंगे।
















