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Tax Rules: वसीयत या विरासत में मिले गोल्ड और शेयर्स पर कितना देना होगा टैक्स? बेचने से पहले जान लें इनकम टैक्स के ये कड़े नियम

भारत में वसीयत या विरासत से मिले सोना, शेयर या संपत्ति पर तुरंत कोई टैक्स नहीं लगता। लेकिन बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स जरूरी - गोल्ड पर 24 माह+ होल्डिंग से 12.5% LTCG, शेयर पर 12 महीने+ पर 12.5% (1.25 लाख छूट)। मूल मालिक का पीरियड गिनता है, दस्तावेज रखें। ITR में खुलासा अनिवार्य, वरना जुर्माना। सावधानी से करोड़ों बचाएं!

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Tax Rules: वसीयत या विरासत में मिले गोल्ड और शेयर्स पर कितना देना होगा टैक्स? बेचने से पहले जान लें इनकम टैक्स के ये कड़े नियम

भारतीय परिवारों में वसीयत या विरासत के जरिए सोना, शेयर, ज्वेलरी या दूसरी संपत्तियां मिलना आम बात है। लेकिन सवाल वही पुराना – क्या विरासत मिलते ही टैक्स देना पड़ता है? अच्छी खबर यह है कि भारत में इनहेरिटेंस टैक्स या एस्टेट ड्यूटी जैसा कोई कानून नहीं है। मिलने के समय कोई टैक्स नहीं लगता। लेकिन खतरा बिक्री के समय कैपिटल गेन टैक्स के रूप में आता है। टैक्स एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि गलत गणना से नोटिस और जुर्माना हो सकता है।

विरासत मिलने पर राहत, लेकिन बिक्री पर सावधानी

लोग अक्सर सोचते हैं कि दादा-दादी से मिले गहने या शेयर तुरंत टैक्स-फ्री हैं। हकीकत यही है- इनकम टैक्स एक्ट के तहत वसीयत या कानूनी उत्तराधिकार से मिली कोई भी संपत्ति टैक्स-न्यूट्रल होती है। गोल्ड, शेयर, प्रॉपर्टी, आर्टवर्क या यहां तक कि क्रिप्टो पर प्राप्ति के समय जीरो टैक्स। लेकिन जब आप इन्हें बेचते हैं, तो कैपिटल गेन की गणना मूल मालिक की खरीद तारीख, लागत और होल्डिंग पीरियड से होती है।

उदाहरण लीजिए: आपके पिता ने 2015 में 10 लाख रुपये में सोना खरीदा। 2026 में आपकी वसीयत से यह आपको मिला और आपने 30 लाख में बेच दिया। होल्डिंग पीरियड 11 साल का माना जाएगा (24 महीने से ज्यादा), यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG)। लाभ 20 लाख पर 12.5% टैक्स बनेगा। शॉर्ट टर्म (24 महीने से कम) पर आपकी स्लैब रेट (5-30%) लागू। शेयरों के लिए पीरियड 12 महीने है।

गोल्ड और ज्वेलरी: दस्तावेज रखें सेफ

विरासत में सोना मिलना पारिवारिक परंपरा है। लेकिन बेचने पर FMV (फेयर मार्केट वैल्यू) साबित न कर पाए तो नुकसान। पुराना बिल न हो तो स्टांप वैल्यूएशन रिपोर्ट लानी पड़ती है, जो टैक्स बढ़ा सकती है। LTCG पर 12.5% फ्लैट (बिना इंडेक्सेशन), STCG स्लैब रेट। बजट 2026 के बाद सोने पर कोई नया बदलाव नहीं, लेकिन GST खरीद पर 3% है। एक्सपर्ट्स कहते हैं – वसीयत कॉपी और मूल खरीद प्रूफ रखें।

शेयर और म्यूचुअल फंड

शेयर बाजार में विरासत आम है। अगर दादा ने 2010 में खरीदा और आप 2026 में बेचें, तो LTCG (12.5%, 1.25 लाख तक छूट)। STCG स्लैब रेट। नॉमिनी हो तो ट्रांसफर आसान, वरना कोर्ट प्रक्रिया लंबी। डिविडेंड इनकम पर TDS कटेगा। ब्रोकर स्टेटमेंट से कॉस्ट बेस वेरिफाई करें।

संपत्ति प्रकारहोल्डिंग पीरियड (LTCG)LTCG टैक्स रेटSTCG टैक्स रेटछूट विकल्प
गोल्ड/ज्वेलरी24 महीने+12.5%स्लैब रेटघर/बॉन्ड में निवेश (10 करोड़ तक) 
इक्विटी शेयर12 महीने+12.5% (1.25 लाख छूट)स्लैब रेट54EC बॉन्ड 
प्रॉपर्टी24 महीने+12.5%स्लैब रेटसेक्शन 54/54F 
क्रिप्टो (VDA)कोई LTCG नहीं30% फ्लैट30% फ्लैटकोई छूट नहीं 

ITR में खुलासा और विदेशी संपत्ति पर जटिलता

अगर कुल संपत्ति 50 लाख से ज्यादा, तो ITR-2/3 में ‘Schedule AL’ में रिपोर्ट करें। विदेशी संपत्ति पर Schedule FA जरूरी, न मानें तो 10 लाख जुर्माना। NRI को विरासत मिले तो FEMA लागू – सालाना 10 लाख डॉलर रेमिटेंस लिमिट। अमेरिका जैसे देशों में इनहेरिटेंस टैक्स (40% तक) लग सकता है, DTAA चेक करें। क्रिप्टो पर प्राइवेट की न हो तो एक्सेस असंभव।

बचाव के उपाय: प्लानिंग से टैक्स बचाएं

  • सभी दस्तावेज (वसीयत, बिल, स्टेटमेंट) डिजिटल रखें।
  • LTCG से कमाई पर 54EC बॉन्ड या घर खरीदें (2 साल में)।
  • परिवार में नॉमिनेशन अपडेट करें।
  • टैक्स कंसल्टेंट से सालाना चेकअप करवाएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता से करोड़ों का टैक्स बच सकता है। विरासत खुशी है, लेकिन बिना प्लानिंग के बोझ बन सकती है। सही जानकारी से ही संपत्ति सुरक्षित रहेगी।

Author
info@nitap.in

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