हर रोज सड़कों पर लाखों गाड़ियां दौड़ रही हैं और पेट्रोल पंपों पर ड्राइवरों की भीड़ लगी रहती है। लेकिन क्या आपने गौर किया कि कई लोग 100 रुपये की जगह 110, 200 की जगह 210 या 500 की जगह 510 रुपये का तेल भरवाते हैं? दावा किया जाता है कि इससे माइलेज बढ़ जाता है और ठगी से भी बचाव हो जाता है। हकीकत में यह सिर्फ एक पुराना भ्रम है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। आइए गहराई से समझें कि ऐसा क्यों होता है और सच्चाई क्या है।

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इस ट्रिक की शुरुआत कैसे हुई?
यह अफवाह सालों पुरानी है। लोग मानते हैं कि पेट्रोल पंप की मशीनें 100, 200 या 500 जैसे गोल नंबरों पर पहले से सेट होती हैं, जिससे ऑपरेटर कम तेल दे देते हैं। इसलिए विषम रकम जैसे 110 या 510 बोलने से मशीन सटीक मात्रा देती है। सोशल मीडिया पर वीडियो बनते हैं जहां दावा होता है कि छोटी रकम से इंजन बेहतर जलता है और माइलेज 10-20 प्रतिशत तक सुधर जाता है। लेकिन यह पूरी तरह गलत है। आज की डिजिटल मशीनें सॉफ्टवेयर से चलती हैं। इनमें तेल का मौजूदा रेट पहले से डाला होता है। अगर पेट्रोल 100 रुपये लीटर है, तो 110 रुपये पर ठीक 1.10 लीटर ही निकलेगा। न ज्यादा, न कम। कोई जादू नहीं।
माइलेज पर असर
माइलेज बढ़ाने का राज इंजन की कंडीशन, ड्राइविंग स्टाइल, टायर का एयर प्रेशर, ईंधन की गुणवत्ता और नियमित सर्विस में छिपा है। 110 रुपये का तेल डलवाने से नोजल से निकलने वाली मात्रा में कोई बदलाव नहीं आता। मान लीजिए आपकी बाइक का औसत माइलेज 50 किमी प्रति लीटर है। 100 रुपये (लगभग 1 लीटर) से 50 किमी चलेगी, तो 110 रुपये (1.10 लीटर) से महज 55 किमी। लेकिन यह बढ़ोतरी मात्रा की वजह से है, ट्रिक की नहीं। छोटी मात्रा से इंजन पर लोड कम होने या बेहतर जलने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं। उल्टा, बार-बार थोड़ा-थोड़ा भरने से टैंक में हवा ज्यादा भर जाती है, जो वाष्पीकरण बढ़ाकर नुकसान पहुंचा सकती है। असली टिप्स हैं फुल टैंक रखना, अच्छा ऑयल इस्तेमाल करना और स्मूथ ड्राइविंग।
असली ठगी कैसे होती है और बचाव के उपाय
पेट्रोल पंपों पर असली समस्या मीटर को जीरो न करना, नोजल से हवा गुजारना या मिलावटी तेल देना है। कुछ ऑपरेटर मीटर की स्पीड तेज कर देते हैं या डिस्प्ले में छेड़छाड़ करते हैं। लेकिन 110 ट्रिक से यह नहीं रुकता। सच्चा बचाव लीटर के हिसाब से मांगने में है। जैसे, दस लीटर पेट्रोल दो। इससे मात्रा साफ दिखती है। नोजल लगाने से पहले मीटर पर 0.00 चेक करें। पेमेंट के बाद रसीद जरूर लें, जिसमें लीटर, रुपये और टैक्स लिखा हो। आजकल यूपीआई पर भी पूरी डिटेल आती है। अगर शक हो, तो पंप का लाइसेंस नंबर नोट करें। टोल-फ्री नंबर 1800-180-1514 पर कॉल करें या सरकारी ऐप पर शिकायत दर्ज करें। जांच में दोषी पाए जाने पर भारी जुर्माना लगता है।
जागरूक बनें, पैसे बचाएं
भारत में करोड़ों वाहन हैं और पेट्रोल की खपत रिकॉर्ड स्तर पर है। ऐसे मिथकों से हर साल लाखों रुपये बर्बाद हो जाते हैं। अगली बार पंप पर पहुंचें, तो स्मार्ट बनें। लीटर बोलें, मीटर देखें, रसीद लें। इससे न सिर्फ आपकी जेब सुरक्षित रहेगी, बल्कि पूरा सिस्टम बेहतर बनेगा। माइलेज बढ़ाने के लिए ट्रिक्स के चक्कर में न पड़ें, बल्कि गाड़ी का ख्याल रखें। सच्ची जानकारी ही सबसे बड़ा हथियार है।
















