ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने वालों के लिए एक और झटका लगा है। देश की सबसे बड़ी फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में करीब 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी। पहले हर ऑर्डर पर 12.50 रुपये ली जाने वाली यह फीस अब बढ़कर 14.90 रुपये हो गई। टैक्स मिलाकर ग्राहकों को प्रति ऑर्डर करीब 17.50 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं। यह नया नियम 20 मार्च से लागू हो चुका है और सभी उपयोगकर्ताओं, यहां तक कि गोल्ड मेंबर्स पर भी लागू हो रहा है।

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बढ़ोतरी के पीछे कॉस्ट का दबाव
कंपनी का कहना है कि यह कदम बढ़ती परिवहन लागत और वैश्विक ईंधन संकट के कारण उठाया गया। कच्चे तेल के दामों में उछाल के साथ मिडिल ईस्ट के तनाव ने लॉजिस्टिक्स को महंगा कर दिया। रेस्टोरेंट मालिकों को कमर्शियल एलपीजी की ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि डिलीवरी स्टाफ की खर्च भी बढ़ गए। सितंबर 2025 में पिछली बार फीस बढ़ाने के बाद यह दूसरी बड़ी हलचल है। बाजार के जानकार मानते हैं कि फूड डिलीवरी उद्योग में लगातार बढ़ते खर्च को कवर करने के लिए कंपनियां ग्राहकों पर निर्भर हो रही हैं।
कंपनी को फायदा, शेयरों में उछाल
इस बदलाव से जोमैटो को तिमाही आधार पर 65 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त कमाई होने का अनुमान है। स्टॉक मार्केट ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कंपनी के शेयरों में तीन प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। प्रतिस्पर्धी स्विगी भी इसी रेंज में फीस वसूल रही है, जिससे साफ है कि पूरा सेक्टर एक ही दिशा में बढ़ रहा। जानकारों का अनुमान है कि अन्य प्लेटफॉर्म भी जल्द अपनी दरें समायोजित कर सकते हैं।
ग्राहकों की जेब पर असर
रोजाना ऐप से खाना मंगाने वाले मध्यमवर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे। सोशल मीडिया पर लोग इसे छिपी हुई महंगाई बता रहे और शिकायतें उमड़ पड़ी हैं। कई यूजर्स का कहना है कि पहले डिलीवरी चार्ज से शुरू होकर अब प्लेटफॉर्म फीस तक सब कुछ बढ़ रहा। कंपनी का दावा है कि यह न्यूनतम राशि सेवा की गुणवत्ता के लिए जरूरी है। हालांकि विश्लेषक चेताते हैं कि बार-बार फीस बढ़ने से ऑर्डर की संख्या घट सकती है।
















