
दुनिया में हजारों भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इनमें से सबसे कठिन कौन सी है? हाल ही में आए भाषा विशेषज्ञों और ‘फॉरेन सर्विस इंस्टीट्यूट’ (FSI) के आंकड़ों ने भाषाई दुनिया के कई दिलचस्प पहलुओं को उजागर किया है, इस फेहरिस्त में जहां मंदारिन चीनी (Mandarin) को दुनिया की सबसे कठिन भाषा माना गया है, वहीं हमारी मातृभाषा हिंदी को लेकर भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
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क्यों ‘मंदारिन’ है दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती?
यूनेस्को और अन्य वैश्विक संस्थानों की मानें तो मंदारिन चीनी को सीखना किसी माउंट एवरेस्ट चढ़ने जैसा है, इसका मुख्य कारण इसकी हजारों चित्रलिपियाँ (Logograms) और ‘टोनल’ प्रकृति है। यानी एक ही शब्द को अलग-अलग सुर में बोलने पर उसका अर्थ पूरी तरह बदल जाता है। इसे सीखने में एक औसत व्यक्ति को लगभग 2,200 घंटे (88 सप्ताह) का कड़ा समय देना पड़ता है।
हिंदी का आंकड़ा: आसान नहीं है हमारी राष्ट्रभाषा!
आंकड़ों के मुताबिक, हिंदी सीखना भी कोई बच्चों का खेल नहीं है FSI ने हिंदी को ‘कैटेगरी III’ यानी ‘मध्यम कठिन’ भाषाओं की श्रेणी में रखा है।
- 1,100 घंटों की मेहनत: एक अंग्रेजी भाषी या विदेशी व्यक्ति को हिंदी में पेशेवर दक्षता (Professional Proficiency) हासिल करने के लिए कम से कम 1,100 घंटे की निरंतर पढ़ाई करनी पड़ती है।
- 44 हफ़्तों का समय: अगर कोई व्यक्ति रोजाना कई घंटों तक हिंदी का अभ्यास करता है, तो भी उसे इसमें महारत हासिल करने में करीब 44 सप्ताह का समय लग जाता है।
हिंदी को क्यों माना गया चुनौतीपूर्ण?
विशेषज्ञों का कहना है कि हिंदी की देवनागरी लिपि विदेशी शिक्षार्थियों के लिए सबसे बड़ी बाधा बनती है, इसके अलावा, हिंदी का व्याकरण अंग्रेजी से बिल्कुल विपरीत है, जहाँ अंग्रेजी में पहले ‘क्रिया’ (Verb) आती है, वहीं हिंदी में क्रिया वाक्य के अंत में आती है (जैसे: ‘मैं जाता हूँ’) । साथ ही, ‘त-ट’, ‘ख-क’ जैसे ध्वनियों के सूक्ष्म अंतर भी इसे चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।
कैसे जल्दी सीखी जा सकती है भाषा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति रोजाना 8 घंटे की ‘इमर्सिव ट्रेनिंग’ (पूरी तरह भाषा में डूबकर सीखना) लेता है, तो वह 3 महीने के भीतर बुनियादी हिंदी सीख सकता है, हालांकि, इसे सामान्य तौर पर बोलने में महारत हासिल करने के लिए 3 साल तक का समय लग सकता है।
















