बिहार के करीब दो करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई है। राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में किसी भी प्रकार की वृद्धि न करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह नया टैरिफ ऑर्डर पहली अप्रैल से अमल में आ जाएगा, जिससे आम आदमी से लेकर छोटे दुकानदार तक सबको फायदा पहुंचेगा। बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तावित दाम बढ़ोतरी की मांग को पूरी तरह नकार दिया गया।

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उपभोक्ताओं को मिलेगा छूट का लाभ
आयोग ने बिजली वितरण कंपनियों के राजस्व में पर्याप्त अधिशेष मिलने का हवाला देते हुए उनकी मांग ठुकरा दी। इसके साथ ही स्लैब प्रणाली को सरल बनाया गया, जिससे शहरी घरेलू ग्राहकों को ऊर्जा शुल्क में औसतन डेढ़ रुपये प्रति यूनिट की कमी का लाभ मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे व्यापारियों को 42 पैसे जबकि शहरी व्यवसायियों को एक रुपये बीस पैसे प्रति यूनिट की राहत सुनिश्चित की गई।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर का इस्तेमाल करने वालों को पच्चीस पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त छूट भी दी जाएगी। ग्रामीण इलाकों में ऊर्जा शुल्क सात रुपये बयालीस पैसे प्रति यूनिट ही रहेगा, लेकिन राज्य की उदार सब्सिडी के चलते वास्तविक बोझ महज दो रुपये पैंतालीस पैसे पर सिमट जाएगा।
फिक्स्ड चार्ज घटे, छोटे दुकानों पर असर
सबसे ज्यादा खुशी छोटे दुकानदारों और उद्यमियों को हुई है, जहां मासिक फिक्स्ड चार्ज में कटौती की गई। शहरी क्षेत्रों में आधा किलोवाट तक लोड वाले कनेक्शन पर यह राशि दो सौ रुपये से घटाकर डेढ़ सौ रुपये कर दी गई। ग्रामीण लघु उद्योगों के लिए दो सौ अठासी किलोवोल्ट एम्पियर से घटकर दो सौ अट्ठहत्तर और शहरी के लिए तीन सौ साठ से घटकर तीन सौ पचास किलोवोल्ट एम्पियर हो गया। इससे लाखों छोटे घरेलू और व्यावसायिक ग्राहक सीधे तौर पर फायदा उठाएंगे। एक सौ पच्चीस यूनिट तक खपत वाले घरों पर फिक्स्ड चार्ज से छूट का प्रावधान पहले की तरह कायम रहेगा।
नई श्रेणियां, बेहतर सुविधाएं
आयोग ने मशरूम की खेती को कृषि कनेक्शन की परिधि में ला दिया, जबकि ऑक्सीजन संयंत्रों को औद्योगिक वर्ग में रखा। दस किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं को समय आधारित टैरिफ का विकल्प उपलब्ध होगा, सिवाय कृषि क्षेत्र के। यदि कहीं बिजली आपूर्ति इक्कीस घंटे से कम रहती है, तो मुआवजा और फिक्स्ड चार्ज में छूट मिलेगी। ये कदम उपभोक्ता हितों को मजबूत करते हुए बिजली सेवाओं को और पारदर्शी बनाते हैं।
यह फैसला महंगाई के दौर में आम बिहारी की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने की दिशा में सराहनीय प्रयास है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और बिजली चोरी पर भी अंकुश लगेगा। अब उपभोक्ता अप्रैल से हल्के बिल पाकर राहत की सांस लेंगे।
















