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1.2 लाख बार चार्जिंग और टोफू वाले पानी से दौड़ेगी कार! चीन की इस ‘अनोखी’ बैटरी ने मचाई खलबली

चीन के वैज्ञानिकों ने सॉल्ट वॉटर बैटरी बनाई, जो टोफू ब्राइन पर चलती है। 1.2 लाख बार चार्ज हो सकती है, फायरप्रूफ और पर्यावरण-अनुकूल। लिथियम-आयन से सस्ती व टिकाऊ। Nature Communications में पब्लिश। EV क्रांति का नया दौर, भारत के लिए वरदान!

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1.2 लाख बार चार्जिंग और टोफू वाले पानी से दौड़ेगी कार! चीन की इस 'अनोखी' बैटरी ने मचाई खलबली

चीन को दुनिया का सबसे हाईटेक देश कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। चीनी वैज्ञानिकों ने एक बार फिर कमाल कर दिखाया है। उन्होंने नमकीन पानी से चलने वाली ऐसी बैटरी तैयार की है जो पर्यावरण के अनुकूल, पूरी तरह सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाली है। यह बैटरी टोफू ब्राइन जैसे नमकीन घोल पर आधारित है और 1.2 लाख से अधिक बार चार्ज हो सकती है। जहां पूरी दुनिया लिथियम-आयन बैटरी पर निर्भर है, वहीं चीन ने सॉल्ट वॉटर बैटरी से बाजार में खलबली मचा दी है। नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, यह खोज इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के भविष्य को बदल सकती है।

टोफू ब्राइन जैसी अनोखी तकनीक

इस बैटरी की सबसे बड़ी खासियत इसका इलेक्ट्रोलाइट है। वैज्ञानिकों ने पानी में मैग्नीशियम क्लोराइड और कैल्शियम क्लोराइड जैसे प्राकृतिक तत्व मिलाकर ऐसा घोल तैयार किया है जो टोफू (सोया पनीर) बनाने वाले नमकीन ब्राइन से मिलता-जुलता है। यह घोल इतना सुरक्षित है कि इसे खाने योग्य माना जा सकता है। पारंपरिक लिथियम बैटरियों में इस्तेमाल होने वाले ज्वलनशील रसायनों के उलट, यह बैटरी आग या विस्फोट का कोई खतरा नहीं पैदा करती।

हांगकांग सिटी यूनिवर्सिटी और यानान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऑर्गेनिक पॉलिमर इलेक्ट्रोड का उपयोग कर इसकी स्थिरता बढ़ाई है। न्यूट्रल pH (7.0) पर काम करने वाली यह बैटरी पानी आधारित होने के कारण पर्यावरण को शून्य नुकसान पहुंचाती है। इसे आसानी से नष्ट किया जा सकता है बिना मिट्टी या पानी को दूषित किए।

1.2 लाख चार्ज साइकिल्स का विश्व रिकॉर्ड

रिसर्च पेपर के मुताबिक, यह बैटरी 1,20,000 से अधिक चार्ज-डिस्चार्ज चक्र झेल सकती है, जिसमें 90% से ज्यादा क्षमता बरकरार रहती है। लिथियम-आयन बैटरी आमतौर पर 2,000-5,000 चक्रों के बाद खराब हो जाती हैं या फूल जाती हैं। लेकिन सॉल्ट वॉटर बैटरी की उम्र दस गुना ज्यादा है। अगर एक EV में इसे लगाया जाए, तो कार मालिक को सालों तक नई बैटरी बदलने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। ऊर्जा घनत्व के मामले में भी यह प्रतिस्पर्धी है, जो पावर ग्रिड स्टोरेज और बड़े वाहनों के लिए आदर्श बनाती है।

आग-ब्लास्ट प्रूफ: सुरक्षा का नया मानक

लिथियम बैटरियों में गर्मी बढ़ने पर आग लगने या ब्लास्ट का खतरा रहता है, जैसा कि हाल के EV हादसों में देखा गया। लेकिन मैग्नीशियम-कैल्शियम क्लोराइड आधारित यह बैटरी पूरी तरह फायरप्रूफ है। पानी आधारित इलेक्ट्रोलाइट ज्वलनशील गैसें नहीं छोड़ता, जिससे दुर्घटनाओं में जान-माल का खतरा खत्म हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक EV बाजार को सुरक्षित बनाएगी, खासकर भारत जैसे देशों में जहां सड़क सुरक्षा बड़ी चुनौती है।

200 साल पुरानी चुनौती का समाधान

पानी आधारित बैटरियों पर पिछले 200 वर्षों से शोध चल रहा था, लेकिन न्यूट्रल pH पर स्थिरता की समस्या बनी हुई थी। चीनी वैज्ञानिकों ने ऑर्गेनिक पॉलिमर नेगेटिव इलेक्ट्रोड से इसे हल कर दिया। यह ढांचा पानी के घोल में इलेक्ट्रोड को मजबूत रखता है, जिससे बैटरी की दक्षता कई गुना बढ़ जाती है। रिसर्च में बताया गया कि यह बैटरी कम तापमान (-20°C) पर भी कुशलतापूर्वक काम करती है।

सस्ता और पर्यावरण-अनुकूल निर्माण

मैग्नीशियम और कैल्शियम पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिससे उत्पादन लागत लिथियम से 30-50% कम हो सकती है। लिथियम खनन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन सॉल्ट बैटरी रिसाइकिलिंग में आसान है। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह वरदान साबित हो सकती है, जहां EV सब्सिडी और सस्ते विकल्पों की जरूरत है। अभी व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं हुआ, लेकिन 2027 तक बाजार में आने की उम्मीद है।

वैश्विक प्रभाव और भारत के लिए अवसर

यह खोज चीन को बैटरी टेक्नोलॉजी में अग्रणी बनाती है। टेस्ला, BYD जैसी कंपनियां इसे अपनाने की होड़ में हैं। भारत में, जहां FAME-III स्कीम EV को बढ़ावा दे रही है, सॉल्ट बैटरी टाटा, महिंद्रा को फायदा पहुंचा सकती है। लेकिन पेटेंट और आयात निर्भरता चुनौती बनेगी। कुल मिलाकर, यह EV क्रांति का टर्निंग पॉइंट है। 

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info@nitap.in

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