
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पेंशन को लेकर लंबे समय से चले आ रहे भ्रम पर बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हायर पेंशन विकल्प बहाल हुआ है, लेकिन यह नई सुविधा नहीं, बल्कि 2014 से पहले की पुरानी व्यवस्था की बहाली मात्र है। खास बात यह है कि इसका लाभ केवल उन कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने 1 सितंबर 2014 से पहले हायर पेंशन का विकल्प चुना था या ऊंची सैलरी पर योगदान दे रहे थे। निजी क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
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2014 की सैलरी कैप ने बदला सबकुछ
2014 में केंद्र सरकार ने पेंशन योग्य सैलरी पर 15,000 रुपये की सीमा लगाई, जिससे अधिकतम पेंशन 7,500 रुपये तक सिमट गई। इससे हाई सैलरी वालों को भारी नुकसान हुआ। ईपीएफ सिस्टम में कर्मचारी और नियोक्ता बेसिक सैलरी + डीए के 12-12% योगदान देते हैं, जिसमें नियोक्ता का 8.33% ईपीएस में जाता है। पहले 6,500 रुपये की कैप पर गणना होती थी, जिसे बढ़ाकर 15,000 किया गया, लेकिन वास्तविक सैलरी से ज्यादा वाले योगदान बंद हो गए। सार्वजनिक क्षेत्र (पीएसयू) में यह प्रथा आम थी, जहां रिटायरमेंट पर आधी सैलरी पेंशन बन जाती थी।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 2022-23 में फैसला दिया कि 2014 से पहले जॉइन करने वालों का हायर पेंशन अधिकार बरकरार रहेगा। ईपीएफओ ने अप्रैल 2023 में सर्कुलर जारी कर जॉइंट ऑप्शन की डेडलाइन 11 जुलाई 2023 तय की। योग्यता साफ है: 2014 से पहले ईपीएस मेंबर, जिन्होंने जॉइंट ऑप्शन भरा लेकिन रिजेक्ट हुआ, या 5,000-6,500 रुपये से ऊपर योगदान किया। 2014 बाद जॉइनर्स या 15,000 से कम सैलरी वाले बाहर।
रिटायर्ड कर्मचारी हायर पेंशन क्लेम फाइल कर सकते हैं, बशर्ते नियोक्ता वेरिफाई करे। फॉर्मूला सरल: (पेंशनेबल सैलरी × सर्विस ईयर्स) / 70। इससे पीएसयू रिटायर्स को 150-300% तक बढ़ोतरी मिल रही है।
आवेदन प्रक्रिया
यूनीफाइड मेंबर पोर्टल (unifiedportal-mem.epfindia.gov.in) पर UAN से लॉगिन करें। ‘Pension on Higher Salary’ में जॉइंट ऑप्शन भरें, नियोक्ता अप्रूव करेगा। डिमांड नोटिस जारी होने पर ईपीएफ से अमाउंट ईपीएस में ट्रांसफर होगा, फिर रिवाइज्ड पीपीओ मिलेगा। स्टेटस PPO नंबर से चेक करें। अस्वीकृति पर अपील संभव। 2026 में ईपीएफओ डिमांड नोटिस तेजी से जारी कर रहा है, खासकर पीएसयू रिटायर्स के लिए।
फायदे vs नुकसान
फायदा साफ: हायर सैलरी पर कैलकुलेशन से मासिक पेंशन बढ़ेगी, लेकिन ईपीएफ लंपसम घटेगा क्योंकि एक्स्ट्रा 1.16% नियोक्ता का योगदान ईपीएस में जाएगा। निजी क्षेत्र के ज्यादातर कर्मचारी, जहां सैलरी कैप पर ही कंट्रीब्यूशन होता है, बाहर रहेंगे। 2026 के बजट में न्यूनतम पेंशन 1,000 से 7,500 रुपये और वेज सीलिंग 25,000 तक बढ़ाने की चर्चा है, लेकिन हायर पेंशन अलग मुद्दा।
ईपीएफओ के इस कदम से चुनिंदा 10-15 लाख सदस्य लाभान्वित होंगे, लेकिन व्यापक सुधार की मांग बरकरार। कर्मचारियों को तुरंत पोर्टल चेक करना चाहिए।
















