राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों को अब FASTag नियमों का और सख्ती से पालन करना पड़ेगा। केंद्र ने हाल ही में डिजिटल टोल प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अगर टोल बूथ पर बैलेंस कम होने या अन्य कारण से भुगतान असफल हो जाता है, तो मालिक को 72 घंटे में रकम जमा करनी होगी। देरी पर मूल राशि का दोहरा शुल्क लगेगा।

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समय सीमा और दंड की पूरी जानकारी
बैरियर रहित टोल प्लाजा से वाहन निकलने पर अगर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भुगतान रिकॉर्ड नहीं कर पाता, तो यह बकाया माना जाएगा। 72 घंटे बीतने पर शुल्क स्वत: दोगुना हो जाएगा। मिसाल के तौर पर, 200 रुपये का टोल बकाया रहने पर 400 रुपये चुकाने पड़ेंगे। इसका उद्देश्य बिना भुगतान टोल पार करने की प्रवृत्ति रोकना और सिस्टम को विश्वसनीय बनाना है।
टोल संचालकों की जिम्मेदारी तय
चालकों के साथ ही टोल प्रबंधक संस्थाओं पर भी नकेल कसी गई है। कोई यात्री शिकायत करे और 5 दिनों में समाधान न हो, तो बकाया रद्द हो जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को न्याय मिलेगा और एजेंसियां सक्रिय रहेंगी।
अवैतनिक शुल्क की परिभाषा और नोटिस प्रक्रिया
नियमों में अवैतनिक शुल्क को साफ तौर पर वर्णित किया गया है। यह तब होता है जब वाहन टोल से गुजरता है लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड में भुगतान न दर्ज हो। मालिक को तत्काल सूचना भेजी जाएगी, जिसमें वाहन का ब्योरा, गुजरने की तिथि, स्थान और राशि शामिल होगी। सूचना एसएमएस, ईमेल, ऐप या समर्पित वेबसाइट से मिलेगी। वाहन डेटाबेस से लिंकेज से बकायेदारों का पता लगाना सरल हो गया है।
यात्रियों के लिए व्यावहारिक सुझाव
FASTag में पर्याप्त धनराशि बनाए रखें। हर लेनदेन की पुष्टि करें। समस्या हो तो फौरन संपर्क करें। 72 घंटे का समय कभी न गंवाएं। ये कदम टोल संग्रह को निष्पक्ष और कुशल बनाएंगे। अनुशासनिक यात्री सुरक्षित रहेंगे, जबकि लापरवाहों को चेतावनी। हाईवे सफर अब अधिक व्यवस्थित होगा!
















