आयकर रिटर्न भरते समय थोड़ी सी लापरवाही महंगी साबित हो सकती है। विभाग ने करदाताओं को साफ चेतावनी दी है कि गलत जानकारी देने पर टैक्स राशि का दोगुना तक जुर्माना लग सकता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा नजदीक आ रही है। ऐसे में सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि आधुनिक तकनीक हर छोटी विसंगति को पकड़ लेती है।

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आम गलतियां जो पड़ती हैं भारी
कई लोग आय को कम दिखाते हैं या बिना सबूत के छूट का दावा करते हैं। मसलन, किराया भत्ता, दान या ब्याज पर कटौती बिना रसीद के मांगना जोखिम भरा है। अनजाने में चूक पर आधी राशि का दंड हो सकता है। लेकिन जानबूझकर गलतियां जैसे नकली बिल बनाना या अतिरिक्त कमाई छिपाना, टैक्स का पूरे 200 प्रतिशत तक वसूल लेते हैं। पर्सनल खर्च को व्यापारिक बताना भी इसी श्रेणी में आता है। क्रिप्टो या फ्रीलांस आय को नजरअंदाज न करें।
जुर्माने और कानूनी जोखिम
इसके साथ सालाना 24 प्रतिशत ब्याज भी जोड़ दिया जाता है। गंभीर उल्लंघन पर सात साल जेल की सजा भी संभव है। विभाग का स्वचालित तंत्र बैंक विवरण, फॉर्म और ट्रांजेक्शन से मैच करता है। अंतर मिलते ही नोटिस भेजा जाता है। देरी से फाइलिंग पर भी 1000 से 10000 रुपये तक का दंड होता है। हालिया मामलों में कईयों को लाखों चुकाने पड़े।
सही तरीके से फाइलिंग कैसे करें?
सबसे पहले उपयुक्त फॉर्म चुनें। नौकरीपेशा लोग सरल ITR-1 या 2 का इस्तेमाल करें। सभी आय स्रोतों की जानकारी दें। हर दावे के कागजात सहेजें। गलती पकड़े जाने पर सुधार वाला रिटर्न भरें। विशेषज्ञ की मदद लें, पर जिम्मेदारी खुद की रखें। समय पर जमा करें ताकि परेशानी न हो।
जागरूकता ही सुरक्षा
आजकल पारदर्शिता बढ़ गई है। छिपाना कठिन है। करदाता सतर्क रहें तो नोटिस का डर नहीं रहेगा। विभाग का यह कदम कर प्रणाली को मजबूत बनाता है। सही जानकारी से ही वित्तीय शांति मिलेगी।
















