किराए के मकान से बाहर निकलते वक्त कई किरायेदारों को मकान मालिकों से झगड़ा झेलना पड़ता है। दीवारों के दाग, फर्श की खरोंच या नल की गड़बड़ी का नाम लेकर सिक्योरिटी डिपॉजिट काट लिया जाता है। लेकिन कानून इस मामले में साफ तौर पर पक्ष लेता है। सामान्य उपयोग से हुई हल्की फुल्की क्षति का बोझ मकान मालिक उठाएगा, न कि किरायेदार।

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कानूनी आधार क्या कहता है?
भारत में किरायेदारी से जुड़े नियमों के अनुसार किरायेदार को संपत्ति उसी हालत में लौटानी होती है जैसी मिली थी। इसमें रोजमर्रा के इस्तेमाल से होने वाली मामूली घिसाई शामिल नहीं। कोर्ट ने कई फैसलों में स्पष्ट किया है कि पेंट झड़ना या दरवाजा ढीला पड़ना मकान मालिक की जिम्मेदारी है। अगर किरायेदार ने लापरवाही बरती या जानबूझकर नुकसान पहुंचाया तो ही उसे पैसा देना पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर दीवार में नाखून गाड़ने से छेद या कुर्सी तोड़ना किरायेदार का मामला बनेगा। राज्य स्तर पर नियम थोड़े अलग हैं। कुछ जगहों पर छोटी मरम्मत किरायेदार की जिम्मेदारी रखी गई है लेकिन बड़ी खराबी जैसे छत टपकना मालिक संभालेगा।
जिम्मेदारी कैसे तय होती है?
स्पष्ट फर्क समझना जरूरी है। किरायेदार तब जिम्मेदार ठहराया जाता है जब नुकसान उसकी गलती से हुआ हो। मकान मालिक को यह साबित करना पड़ता है। दूसरी ओर प्लंबिंग या बिजली की बुनियादी खराबी मालिक की देखभाल का विषय है। किराया समझौते में अगर मरम्मत का जिक्र हो तो उसी के आधार पर फैसला होता है। ज्यादातर मामलों में सिक्योरिटी अमानत केवल सिद्ध नुकसान के लिए काटी जा सकती है।
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वकीलों की विशेषज्ञ राय
कानूनी जानकारों का मानना है कि विवाद से बचाव आसान है। मकान लेते समय फोटो खींचें और विस्तृत सूची बनाएं। छोड़ते समय दोनों पक्ष साथ मिलकर जांच करें। रिपोर्ट तैयार रखें जिसमें शुरुआती और आखिरी हालत दर्ज हो। अगर मालिक मनमानी करे तो स्थानीय किराया अधिकारी या कोर्ट जाएं। उत्तराखंड जैसे राज्यों में ऐसे सैकड़ों केस सालाना दर्ज होते हैं और ज्यादातर में किरायेदारों को न्याय मिलता है।
बचाव के आसान उपाय
समझौते में मरम्मत शर्तें साफ लिखवाएं। जांच के दौरान तटस्थ व्यक्ति को बुलाएं। गंदगी या छोटे नुकसान को तुरंत ठीक कर दें। कानूनी सहायता सेवाएं मुफ्त सलाह देती हैं। किरायेदार जागरूक हों तो मालिकों की मनमानी रुकेगी। मकान मालिक भी समझें कि बिना सबूत के दबाव बनाना उल्टा पड़ सकता है। सतर्क रहें और अपने हक के लिए लड़ें।
















