
देश में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, फार्मा सेक्टर से आई एक ताजा और डरावनी चेतावनी ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है, खबर है कि शुगर (मधुमेह) और बुखार जैसी बुनियादी बीमारियों की दवाओं का स्टॉक खत्म होने की कगार पर है विशेषज्ञों का दावा है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो अगले 10 दिनों में बाजार से जरूरी दवाइयां गायब हो सकती हैं।
Table of Contents
क्यों खड़ा हुआ यह ‘मेडिकल इमरजेंसी’ जैसा संकट?
इस किल्लत के पीछे मुख्य वजह ग्लोबल सप्लाई चेन का टूटना है। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध और तनाव के कारण कच्चे माल की आपूर्ति ठप हो गई है। दवाओं को बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले Active Pharmaceutical Ingredients (API) की कीमतों में 30% तक का उछाल आया है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो गया है।
इन दवाओं पर मंडरा रहा है खतरा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबसे ज्यादा असर उन दवाओं पर पड़ने वाला है जो हर घर की जरूरत हैं:
- बुखार और दर्द: पैरासिटामोल (Paracetamol) की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।
- शुगर: डायबिटीज के मरीजों के लिए जीवन रक्षक मानी जाने वाली ‘मेटफॉर्मिन’ (Metformin) का स्टॉक न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है।
- एंटीबायोटिक्स और विटामिन: एमोक्सिसिलिन और एज़िथ्रोमाइसिन जैसी दवाओं के साथ-साथ विटामिन और हार्मोनल दवाओं की कमी भी देखी जा रही है।
फार्मा हब में उत्पादन पर ‘ब्रेक’
गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे देश के बड़े फार्मा हब्स में प्रोपेन और LPG जैसी गैसों की भारी कमी हो गई है। ऊर्जा संकट के चलते कई फैक्ट्रियां अपनी क्षमता से बहुत कम काम कर रही हैं। फेडरेशन ऑफ फार्मा एंटरप्रेन्योर्स (FOPE) ने सरकार को आगाह किया है कि अगर कच्चे माल और पैकेजिंग मटेरियल (जैसे PVC) की कृत्रिम कमी को तुरंत दूर नहीं किया गया, तो देश में दवाओं के लिए हाहाकार मच सकता है।
सरकार से दखल की मांग
फार्मा इंडस्ट्री ने सरकार से मांग की है कि वह ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत दखल दे और दवाओं की कीमतों व उपलब्धता को नियंत्रित करे, हालांकि, सरकार ने बजट 2026 में कैंसर और शुगर की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी घटाकर राहत देने की कोशिश की थी, लेकिन कच्चा माल न होने के कारण यह राहत बेअसर साबित हो रही है।
आम जनता के लिए क्या है स्थिति?
फिलहाल जानकारों का कहना है कि लोगों को ‘पैनिक बाइंग’ (घबराहट में खरीदारी) से बचना चाहिए, लेकिन जो मरीज गंभीर बीमारियों की दवा नियमित लेते हैं, उन्हें सतर्क रहने की जरुरत है, सप्लाई बहाल होने में देरी हुई तो आने वाले दो हफ्ते देश के हेल्थ केयर सिस्टम के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
















