उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने वाला मेरठ का प्रस्तावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर अब चर्चा का केंद्र बन गया है। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे हापुड़ रोड क्षेत्र में दूसरे चरण के तहत 292 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की गई है। यह परियोजना खड़खड़ी, छतरी और गोविंदपुरी जैसे तीन गांवों को केंद्र में रखकर आकार ले रही है। आधुनिक कारखाने, गोदाम और लॉजिस्टिक्स केंद्र स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर हजारों रोजगार के द्वार खुलने की उम्मीद है। राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षा से क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने को तैयार है, लेकिन किसानों का विरोध इसे जटिल बना रहा है।

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पहला चरण पूरा, दूसरा चरण गति पकड़ रहा
पहले चरण में बिजौली और खरखौदा गांवों की 214 हेक्टेयर जमीन पर काम तेजी से चल रहा है। यहां विदेशी कंपनियां निवेश के लिए उत्सुक नजर आ रही हैं। दूसरे चरण के लिए जिला प्रशासन ने करीब 453 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है, जिसमें मुख्य रूप से जमीन का मूल्य शामिल है। मकानों, पेड़ पौधों और अन्य संपत्तियों का अलग से आकलन होगा। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को उचित मुआवजा और रियायती दरों पर वैकल्पिक जमीन का विकल्प दिया जाएगा। यह कॉरिडोर न केवल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा, बल्कि पूरे क्षेत्र को लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करेगा।
किसानों में भय और आक्रोश का माहौल
स्थानीय किसान इस योजना से असंतुष्ट हैं। खड़खड़ी गांव के एक बुजुर्ग किसान ने बताया कि उनकी पुश्तैनी खेती की जमीन छिन जाना उनके परिवार का भविष्य अंधकारमय कर देगा। छतरी और गोविंदपुरी में ग्रामीण सभाएं हो रही हैं, जहां लोग एकजुट होकर जमीन देने से इनकार कर रहे। उनका तर्क है कि मुआवजे की राशि कम है और भविष्य में रोजगार का वादा कागजी ही साबित होगा। प्रशासन लगातार बैठकें कर रहा है, लेकिन सहमति बनाना मुश्किल हो रहा। पहले चरण में भी कुछ हिस्सों पर विवाद लंबित है, जो दूसरे चरण को प्रभावित कर सकता है। किसान संगठन इसे किसान विरोधी कदम बता रहे हैं।
व्यापक नेटवर्क का हिस्सा
यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के प्रमुख एक्सप्रेसवे परियोजनाओं से जुड़ा है। गंगा एक्सप्रेसवे सहित पूर्वांचल जैसे रास्तों के किनारे कई जिलों में इसी तरह के कॉरिडोर विकसित हो रहे हैं। कुल मिलाकर सैकड़ों हेक्टेयर जमीन पर काम चल रहा है, जिसका निवेश हजारों करोड़ में है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह नेटवर्क 12 जिलों को जोड़ेगा। नई औद्योगिक नगरी बसाने की योजना से नोएडा जैसे हब की तर्ज पर विकास होगा। निवेशकों को बिजली, पानी जैसी सुविधाएं सब्सिडी पर मिलेंगी, जिससे बड़े उद्योग आकर्षित होंगे।
चुनौतियां और भविष्य की राह
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की औद्योगिक नीति से प्रेरित यह प्रोजेक्ट राज्य को उत्पादन केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। जापान और जर्मनी जैसे देशों की कंपनियां पहले ही रुचि जता चुकी हैं। हालांकि किसानों का विरोध बड़ी बाधा है। विपक्ष इसे किसानों के हक पर कुठाराघात बता रहा। सफलता तभी मिलेगी जब प्रशासन और ग्रामीण संवाद को प्राथमिकता दे। हापुड़ रोड का इलाका जल्द ही औद्योगिक गतिविधियों से गुलजार हो सकता है। क्या यह विकास की नई कहानी लिखेगा या विवादों में उलझेगा, यह आने वाले महीनों में साफ होगा। मेरठ विकास की दहलीज पर टिका है।
















