रसोई गैस के दामों में ताजा बढ़ोतरी ने आम आदमी की जेब पर बोझ डाला है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि पेट्रोल और डीजल के दामों में फिलहल कोई इजाफा नहीं होगा। केंद्र सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि ईंधन कीमतें स्थिर रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। वैश्विक तनाव के बावजूद देश की तेल सप्लाई चेन मजबूत बनी हुई है।

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घरेलू गैस पर भारी पड़ रही वृद्धि
पिछले हफ्ते सरकार ने 14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ा दी। दिल्ली में अब यह 913 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह 19 किलो के व्यावसायिक सिलेंडर पर 115 रुपये का अतिरिक्त चार्ज लगाया गया। इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का उछाल है। ब्रेंट क्रूड अब 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है। फिर भी सरकार का कहना है कि एलपीजी अभी भी नुकसान वाले स्तर से नीचे बिक रहा है। लाखों परिवारों को सब्सिडी जरूर मिल रही है, लेकिन नॉन-यूजीपीसी ग्राहकों को पूरा बोझ सहना पड़ रहा।
ईंधन कीमतें क्यों स्थिर?
पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार देश के पास 25 दिनों का कच्चा तेल का पर्याप्त भंडार है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल-ईरान विवाद के बावजूद आयात सुचारू चल रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य के अलावा वैकल्पिक मार्गों से 10 प्रतिशत ज्यादा तेल मंगाया जा रहा। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये पर टिका हुआ। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई जैसे शहरों में भी कोई बदलाव नही। सरकारी तेल कंपनियां घाटे झेल रही हैं, लेकिन बाजार स्थिरता को प्राथमिकता दी जा रही।
भविष्य की रणनीति क्या?
सरकार वेट एंड वॉच नीति अपना रही। एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और स्टॉक जमा करने पर जोर। रूस, अमेरिका, सऊदी से 85 प्रतिशत आयात होने से निर्भरता कम हुई। ओपेक की कटौती और ईरान प्रतिबंध तेल को 100 डॉलर तक ले जा सकते हैं, लेकिन भारत की तैयारी पक्की। विपक्ष चुनावी लाभ का आरोप लगा रहा, जबकि सत्ताधारी दल आर्थिक प्रबंधन का दावा कर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्साइज ड्यूटी घटाकर या सब्सिडी देकर उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती। फिलहाल सस्ते ईंधन की उम्मीद कम, लेकिन महंगाई से पूरी तरह निजात नहीं।
उपभोक्ता क्या करें?
आम लोग ईंधन बचत पर ध्यान दें। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल जरूरी। सरकार की यह रणनीति लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकती। जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता के दौर में स्थिरता ही सबसे बड़ा हथियार।
















