
देश की सर्वोच्च अदालत ने बैंकों में लावारिस पड़े करोड़ों रुपयों और मृत खाताधारकों की जमा पूंजी को लेकर एक ऐतिहासिक रुख अपनाया है सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया है कि आम जनता की गाढ़ी कमाई, जिसे ‘अपनों की अमानत’ कहा जाता है, उस पर उनके कानूनी वारिसों का हक है और उन्हें इसके लिए भटकने पर मजबूर नहीं किया जा सकता।
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क्या है पूरा मामला?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने पाया कि देश के विभिन्न बैंकों, बीमा कंपनियों और डाकघरों में ₹1.08 लाख करोड़ से अधिक की राशि ‘अनक्लेम्ड’ (Unclaimed) पड़ी है। यह वह पैसा है जिसका कोई वारिस सामने नहीं आया या तकनीकी जटिलताओं के कारण वारिसों को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ और निर्देश:
- जवाबदेही तय हो: कोर्ट ने सवाल किया कि जब किसी खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो बैंकों के पास ऐसा कोई सिस्टम क्यों नहीं है जो सक्रिय रूप से वारिसों को सूचित करे?
- सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और RBI को एक केंद्रीय ऑनलाइन डेटाबेस (Centralized Database) बनाने पर विचार करने को कहा है, जहाँ वारिस आसानी से अपने परिजनों की जमा राशि, शेयर और बीमा का विवरण देख सकें।
- पॉलिसी फ्रेमवर्क: बेंच ने सरकार को निर्देश दिया है कि इस समस्या के समाधान के लिए एक ठोस नीति तैयार की जाए ताकि ‘अपनों की अमानत’ सही हाथों में सुरक्षित पहुँच सके।
- चार हफ्ते का समय: अदालत ने अधिकारियों को नए हलफनामे (Affidavit) दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 5 मई 2026 को होनी तय हुई है।
वारिसों के लिए क्यों है यह राहत?
वर्तमान नियमों के अनुसार, यदि कोई खाता 10 वर्षों तक सक्रिय नहीं रहता, तो उसकी राशि RBI के ‘डिपाजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड’ (DEAF) में चली जाती है। इसे वापस पाना वारिसों के लिए एक लंबी और थकाऊ कानूनी प्रक्रिया बन जाती है, सुप्रीम कोर्ट के इस ‘वार’ के बाद उम्मीद जागी है कि अब बैंकों को खुद आगे आकर वारिसों की पहचान करनी होगी और क्लेम प्रक्रिया को सरल बनाना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सेंट्रलाइज्ड सिस्टम लागू होता है, तो लाखों परिवारों को उनके हक का पैसा बिना किसी बिचौलिए या दफ्तरों के चक्कर काटे मिल सकेगा।
















