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SIR Phase 3: दिल्ली समेत 22 राज्यों में इस महीने शुरू होगा काम, क्या जनगणना पर पड़ेगा इसका असर?

चुनाव आयोग ने दिल्ली समेत 22 राज्यों/UTs को SIR चरण-3 के लिए अप्रैल 2026 से तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। 39 करोड़ मतदाताओं को कवर करने वाली यह प्रक्रिया जनगणना 2027 के हाउसलिस्टिंग से टकराएगी, जिससे शेड्यूल एडजस्टमेंट जरूरी हो गया है।

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देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए चुनाव आयोग (ECI) ने मतदाता सूचियों को शुद्धिकरण की मुहिम तेज कर दी है। गुरुवार को आयोग ने दिल्ली समेत 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को पत्र लिखकर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तीसरे चरण की तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। अप्रैल 2026 से शुरू होने की संभावना वाले इस चरण से करीब 39 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जाएगा, लेकिन जनगणना 2027 के हाउसलिस्टिंग चरण से टकराव की स्थिति ने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

SIR प्रक्रिया का उद्देश्य

SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूचियों से मृत, स्थानांतरित या अयोग्य नाम हटाना तथा नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना है। पहले चरण में बिहार कवर हुआ, जबकि दूसरे चरण (27 अक्टूबर 2025 से शुरू) में 12 राज्य/UT शामिल थे, जिनमें लगभग 60 करोड़ मतदाता प्रभावित हुए। अब तीसरा चरण शेष 22 इकाइयों पर केंद्रित है, जिनमें उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना जैसे राज्य तथा दिल्ली, चंडीगढ़, लद्दाख, दादरा-नगर हवेली एवं दमन-दीव जैसे UT शामिल हैं।

चरणबद्ध कार्यान्वयन और समयसीमा

हालांकि आयोग ने सभी 22 को पत्र भेजा है, लेकिन पिछले चरणों के अनुभव से संकेत मिलता है कि सभी को एक साथ शामिल नहीं किया जाएगा। बोर्ड परीक्षाओं (फरवरी-मार्च) के बाद अप्रैल से शुरू होने की योजना है, क्योंकि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), जो ज्यादातर शिक्षक हैं, परीक्षा ड्यूटी से मुक्त होंगे। प्रक्रिया जून-जुलाई तक खिंच सकती है, जिसमें घर-घर सत्यापन, दस्तावेज जांच और डिजिटल अपडेट शामिल होंगे। आयोग ने BLOs की उपलब्धता और दस्तावेज सत्यापन को सरल बनाने पर जोर दिया है, ताकि पिछले चरणों की समस्याएं न हों।

जनगणना से टकराव

सबसे गंभीर मुद्दा जनगणना 2027 का हाउसलिस्टिंग ऑपरेशन है, जो 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक 45 दिनों में चलेगा। दिल्ली ने 15 अप्रैल से जून तक, हरियाणा व ओडिशा ने भी तिथियां अधिसूचित की हैं, जो SIR से ओवरलैप करेंगी। इन राज्यों में कर्मचारी कमी (दिल्ली में 40,000 को ट्रेनिंग की जरूरत) संसाधन साझा करने से जटिलताएं बढ़ेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य या तो जनगणना शेड्यूल एडजस्ट करें या ECI से SIR स्थगन की मांग करें। अन्य राज्य जून-जुलाई बाद जनगणना टाल सकते हैं।

राजनीतिक प्रभाव और आगे की राह

यह टकराव 2029 लोकसभा चुनावों से पहले सूचियों को अपडेट करने की होड़ को प्रभावित कर सकता है। मणिपुर-उत्तराखंड जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव (मार्च 2027) नजदीक होने से दबाव और बढ़ेगा। विपक्ष ने पहले बिहार SIR पर सवाल उठाए थे, लेकिन आयोग ने इसे खारिज किया।

समन्वय जरूरी

ECI को चरणबद्ध SIR अपनाना चाहिए, जैसा पहले हुआ। जनगणना विभाग से समन्वय बढ़ाकर डेटा साझा किया जा सकता है। नागरिकों से अपील है कि वोटर हेल्पलाइन ऐप या ERP पोर्टल पर नाम चेक करें। यह प्रक्रिया न केवल निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करेगी, बल्कि डिजिटल इंडिया को मजबूत करेगी। आगामी हफ्तों में तिथियां स्पष्ट होंगी। 

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info@nitap.in

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