
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के भूमि अधिग्रहण मामलों पर अहम मौखिक टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने स्पष्ट कहा कि 2018 से पहले निपट चुके या बंद हो चुके केसों को ब्याज सहित अतिरिक्त मुआवजे के लिए दोबारा नहीं खोला जाएगा। यह टिप्पणी NHAI की 2019 के फैसले की समीक्षा याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें किसानों को पुरानी तारीख से मुआवजा देने का निर्देश था।
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2019 फैसले की पृष्ठभूमि
2019 के “भारत सरकार बनाम तरसेम सिंह” मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NHAI एक्ट 1956 के तहत अधिग्रहीत जमीनों के किसानों को उच्च मुआवजा, 30% सोलाटियम और ब्याज देने का आदेश दिया था। यह फैसला 1997 से 2015 के बीच नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए ली गई जमीनों पर लागू था। NHAI ने दावा किया कि इससे 32,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ेगा, जबकि शुरुआत में अनुमान मात्र 100 करोड़ बताया गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच से कहा कि फैसला केवल आगे से लागू हो, अन्यथा प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ेगा।
बेंच ने पहले इस दलील को खारिज कर दिया था, यह कहते हुए कि ऐसा करने से अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन होगा। 4 फरवरी 2025 को भी NHAI की याचिका खारिज हुई, लेकिन नवंबर 2025 में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई सहमत हुई। सोमवार को खुली अदालत में CJI ने कहा, “2018 से पहले के मामले फिर से नहीं खुलेंगे। 2008 से लंबित क्लेम चल सकते हैं, लेकिन नए दावों में सोलाटियम मिलेगा, ब्याज नहीं।” बेंच ने पार्टियों से लिखित सबमिशन मांगे और दो हफ्ते बाद सुनवाई तय की।
NHAI और हाईवे प्रोजेक्ट्स पर प्रभाव
यह टिप्पणी NHAI के लिए राहत है। पुराने बंद केसों पर अनिश्चितता खत्म होने से हाईवे निर्माण तेज होगा। देशभर में हजारों किलोमीटर सड़कों पर देरी रुकेगी, क्योंकि 32,000 करोड़ का बोझ टल गया। हालांकि, 2008 के बाद लंबित मामले प्रभावित होंगे, जहां किसान पैरिटी (समान मुआवजा) के हकदार बने रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बजट पर दबाव कम होगा और प्रोजेक्ट्स जैसे दिल्ली-मेरठ RRTS पर काम सुगम होगा।
किसानों के अधिकार और चुनौतियां
किसानों के लिए दोहरा असर है। एक ओर समान मुआवजे की मांग मजबूत हुई, दूसरी ओर पुराने केस बंद। CJI ने जोर दिया कि मुआवजा निष्पक्ष हो, लेकिन कार्यपालिका द्वारा तय प्रक्रिया पर सवाल उठाए। NHAI एक्ट में कलेक्टर द्वारा मुआवजा तय करना और अपील नौकरशाहों तक सीमित होना संविधान के खिलाफ बताया। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी धारा 3G-3J असंवैधानिक कहा था। अब लिखित फैसला आने पर स्पष्टता मिलेगी।
कानूनी और नीतिगत निहितार्थ
यह मामला भूमि अधिग्रहण कानूनों में सुधार की मांग करता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से NHAI एक्ट पर पुनर्विचार की सलाह दी, स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया पर जोर दिया। इससे RFCTLARR Act 2013 और पुराने कानूनों में समानता लाने की जरूरत उभरी। किसान संगठन हाईवे प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता चाहते हैं। कुल मिलाकर, यह फैसला विकास और किसान हितों के बीच संतुलन साधने की दिशा में कदम है।
















