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कहीं जानलेवा न साबित हो जाए घिसे हुए टायर! इन 5 संकेतों को न करें नजरअंदाज, तुरंत बदलें

कार टायर टिप्स: घिसे टायर न बनें जानलेवा! ट्रेड गहराई 1.6 मिमी से कम, 5 साल पुराने टायर, साइडवॉल दरारें, असमान घिसावट और वाइब्रेशन जैसे 5 संकेतों को नजरअंदाज न करें। नियमित एयर प्रेशर चेक, रोटेशन और एलाइनमेंट से लाइफ बढ़ाएं। सुरक्षित ड्राइविंग के लिए तुरंत बदलें पुराने टायर!

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कहीं जानलेवा न साबित हो जाए घिसे हुए टायर! इन 5 संकेतों को न करें नजरअंदाज, तुरंत बदलें

सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ते वाहनों के लिए टायर जानलेवा हथियार बन सकते हैं, अगर उनकी स्थिति सही न हो। किसी भी गाड़ी के लिए टायर सबसे अहम हिस्सा होते हैं, क्योंकि यही सड़क और वाहन के बीच सीधा संपर्क बनाते हैं। खराब टायर न केवल दुर्घटना का खतरा बढ़ाते हैं, बल्कि माइलेज भी कम कर देते हैं। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में होने वाली 30 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाओं का कारण पुराने या घिसे टायर ही पाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चालकों को टायर बदलने के सही समय और प्रमुख संकेतों को पहचानना सीखना चाहिए। आइए, जानते हैं इन 5 खतरे के संकेतों को विस्तार से, जो नजरअंदाज करने पर भारी पड़ सकते हैं।

ट्रेड डेप्थ का घिसाव

टायर की सतह पर बनी ग्रिप वाली नालीदार लाइनें ट्रेड कहलाती हैं। जब इनकी गहराई 1.6 मिलीमीटर से कम रह जाती है, तो टायर बदलने का समय आ गया समझें। भारत जैसे मानसून प्रभावित देश में यह और भी खतरनाक है, क्योंकि कम ट्रेड गीली सड़क पर पकड़ कमजोर कर फिसलन बढ़ा देते हैं। पेनी टेस्ट से आसानी से चेक करें: 1 रुपये का सिक्का ट्रेड में डालें, अगर क्वीन का सिर दिखे तो तुरंत बदलें। ऊपर दी गई जानकारी के अनुसार, ट्रेड कम होने से ब्रेकिंग दूरी 20-30 प्रतिशत बढ़ सकती है, जो हाईवे पर स्पीड में घातक साबित होती है।

टायर की उम्र: समय के साथ कमजोर रबर

भले ही टायर ज्यादा न चले हों, लेकिन 5 साल या उससे अधिक पुराने टायर खतरनाक होते हैं। रबर समय के साथ ऑक्सीडेशन से कमजोर पड़ जाता है। साइडवॉल पर DOT नंबर चेक करें- उसके आखिरी 4 अंक सप्ताह और साल बताते हैं, जैसे 2323 का मतलब 2023 की 23वीं हफ्ते का टायर। 6 साल पुराने टायर हमेशा बदल दें, क्योंकि ये तेज स्पीड या गर्मी में फट सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कम इस्तेमाल वाले वाहनों में भी हर साल टायर की स्थिति जांची जाए।

साइडवॉल पर दरारें या बार-बार पंक्चर

टायर के किनारों पर सूखी दरारें, कट्स या बल्लू (बल्बिंग) दिखें तो आंतरिक क्षति का संकेत है। बार-बार पंक्चर होना भी इसी की निशानी है। ऐसे टायर मरम्मत के लायक नहीं; नया लगवाएं। प्रदूषण भरे शहरों जैसे दिल्ली में रबर जल्दी सख्त हो जाता है, जिससे साइडवॉल कमजोर पड़ते हैं। नजरअंदाज करने पर हाई स्पीड में फटने का जोखिम 5 गुना बढ़ जाता है।

असमान घिसावट: एलाइनमेंट की चेतावनी

टायर का एक तरफा या बीच-किनारों पर असमान घिसाव व्हील एलाइनमेंट, बैलेंसिंग या सस्पेंशन समस्या दर्शाता है। बीच चिकना होना अधिक हवा दबाव, किनारे चिकने होना कम प्रेशर की वजह से होता है। इससे हैंडलिंग बिगड़ती है और गाड़ी खिंचाव महसूस होती है। तुरंत मैकेनिक से चेक कराएं, वरना टायर लाइफ आधी रह जाती है।

वाइब्रेशन और खराब हैंडलिंग

ड्राइविंग में स्टीयरिंग, सीट या फर्श पर कंपन महसूस हो या ब्रेक पर गाड़ी एक तरफ खिंचे, तो टायर असंतुलित हैं। गीले रास्ते पर यह फिसलन का कारण बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकेत आने पर 90 प्रतिशत मामलों में टायर बदलना पड़ता है।

टायर लाइफ बढ़ाने के आसान उपाय

टायर की उम्र और सुरक्षा के लिए नियमित रखरखाव जरूरी है। हर हफ्ते एयर प्रेशर चेक करें- कार के लिए 30-35 PSI आदर्श। 5,000-8,000 किमी पर रोटेशन कराएं, ताकि समान घिसाव हो। व्हील एलाइनमेंट और बैलेंसिंग हर 10,000 किमी पर। ओवरलोडिंग से बचें, क्योंकि अतिरिक्त वजन टायर पर दबाव डालता है। दिल्ली जैसे ट्रैफिक वाले शहरों में 40-50 हजार किमी पर टायर बदलें। गुणवत्ता वाले ब्रांड चुनें और हमेशा स्पेयर टायर तैयार रखें।

निष्कर्षतः, घिसे टायर सड़क पर बम के समान हैं। चालक भाइयों, इन संकेतों को नजरअंदाज न करें। नियमित चेकअप से न केवल जीवन बचाएं, बल्कि ईंधन भी बचाएं। सुरक्षित ड्राइविंग ही असली मंत्र है!

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info@nitap.in

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