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यूपी का ‘टीचर्स वाला गांव’! मात्र 600 घरों से निकले 300 से ज्यादा मास्टर; ‘मास्टरों की फैक्ट्री’ कहलाता है यह इलाका

बुलंदशहर का सांखनी गांव टीचर्स की फैक्ट्री बन गया। 500 साल पुरानी परंपरा, मेहनत का कमाल देखो। डॉक्टर से अफसर तक सब यहां से! क्या तुम्हारा गांव ऐसा कर सकता? पढ़ो पूरी अनोखी कहानी।

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उत्तर प्रदेश का बुलंदशहर जिला शिक्षा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान रच रहा है। यहां जहांगीराबाद ब्लॉक के सांखनी गांव को लोग टीचर्स का खजाना कहते हैं। करीब 600 से 700 घरों वाले इस गांव ने देश भर में 300 से अधिक शिक्षकों को जन्म दिया है। 14 से 15 हजार की आबादी वाला यह इलाका हर गली मोहल्ले में मास्टरों की कहानी बुनता है। प्राइमरी से लेकर उच्च स्तर के शिक्षक, यहां हर कोने से निकलते हैं।

यूपी का 'टीचर्स वाला गांव'! मात्र 600 घरों से निकले 300 से ज्यादा मास्टर; 'मास्टरों की फैक्ट्री' कहलाता है यह इलाका

गांव की पुरानी परंपरा

सांखनी का इतिहास 500 साल पुराना है। शुरू में कुछ समर्पित शिक्षकों ने गांव में पढ़ाई का दीप जलाया। उनके प्रयासों से बच्चों में शिक्षा के प्रति लगाव पैदा हुआ। धीरे धीरे यह जज्बा पूरे समुदाय में फैल गया। आज हर परिवार में कोई न कोई सरकारी स्कूल में पढ़ाता है। चाहे TGT हो, PGT हो या प्रधानाध्यापक, सफलता की यह श्रृंखला रुकने का नाम नहीं ले रही। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि कठिनाइयों के बावजूद किताबों से कभी मुंह नहीं मोड़ा।

सफलता के रहस्य

इस गांव की खासियत मेहनत और एकजुटता है। बच्चे दिन में खेतों की मिट्टी से सने हाथों से काम करते हैं, शाम को किताबें थाम लेते हैं। परिवार वाले कोचिंग का खर्च उठाते हैं, डिग्री पूरी करवाते हैं। नशे या गलत रास्ते यहां की पहचान से कोसों दूर हैं। महिलाएं भी कम नहीं रहीं। कई बेटियां शहरों के नामी स्कूलों में पढ़ा रही हैं। TET और CTET जैसी परीक्षाओं में सफलता ने इन्हें दिल्ली, हरियाणा तक पहुंचाया। पूरा गांव एक दूसरे को प्रेरित करता रहता है।

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बहुमुखी प्रतिभाएं

शिक्षा के साथ सांखनी अन्य क्षेत्रों में भी चमक रहा है। डॉक्टर, इंजीनियर, पुलिस वाले, पत्रकार यहां से निकले हैं। एयर होस्टेस से लेकर वकीलों तक की सफल कहानियां प्रेरणा देती हैं। गांव वालों ने अपनी उपलब्धियों को एक किताब में संजोया भी है। युवा अब UPSC जैसी ऊंची परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं। सरकारी योजनाओं ने मदद की, लेकिन असली ताकत इनकी लगन है।

चुनौतियां और भविष्य

संसाधनों की कमी यहां भी है। बेहतर कोचिंग केंद्र और डिजिटल टूल्स की जरूरत महसूस होती है। फिर भी गांव आगे बढ़ रहा है। स्थानीय रामेश्वर सिंह कहते हैं, हमारा हर घर सफलता की मिसाल है। बाहर वाले हैरान होकर देखते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ऐसे गांवों को सम्मान देने की सोच रही है। सांखनी साबित करता है कि छोटा सा गांव भी बड़ा सपना देख सकता है। क्या यह फैक्ट्री अब अफसरों का कारखाना बनेगी, आने वाला समय ही बताएगा।

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info@nitap.in

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