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नवोदय विद्यालय में EWS कोटा क्यों नहीं? MP हाईकोर्ट का केंद्र सरकार से तीखा सवाल; क्या एडमिशन नियमों में होंगे बड़े बदलाव

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नवोदय विद्यालयों में EWS कोटा न लागू करने पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। छात्रा की याचिका पर एक सप्ताह में जवाब मांगा। संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देकर बड़े बदलाव की उम्मीद।

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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने जवाहर नवोदय विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षण न देने पर केंद्रीय सरकार से कड़ा जवाब तलब किया है। एक छात्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने शिक्षा मंत्रालय और नवोदय विद्यालय समिति को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। यह फैसला ग्रामीण शिक्षा प्रणाली में समावेशिता की बहस को नई गति दे सकता है।

नवोदय विद्यालय में EWS कोटा क्यों नहीं? MP हाईकोर्ट का केंद्र सरकार से तीखा सवाल; क्या एडमिशन नियमों में होंगे बड़े बदलाव

मामले की पृष्ठभूमि

नवोदय विद्यालय योजना ग्रामीण मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 1986 में शुरू हुई। वर्तमान में पूरे देश में 650 से ज्यादा ऐसे स्कूल संचालित हो रहे हैं। कक्षा-6 में प्रवेश जिला स्तर की परीक्षा से होता है, जहां ग्रामीण quota 75 प्रतिशत, लड़कियों को 33 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 15 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 7.5 प्रतिशत और पिछड़े वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। दिव्यांग बच्चों को भी छूट है। लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए 10 प्रतिशत कोटा का कहीं जिक्र नहीं। याचिकाकर्ता का कहना है कि संविधान के प्रावधानों के बावजूद यह विसंगति अन्यायपूर्ण है।

संवैधानिक प्रावधान और विवाद

संविधान के 103वें संशोधन ने सामान्य वर्ग के गरीब परिवारों, जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपये से कम है, को सरकारी संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार दिया। उच्चतम न्यायालय ने भी इसे वैध घोषित कर चुका है। फिर भी नवोदय में इसका पालन नहीं हो रहा। याचिका में उल्लेख है कि जब केंद्रीय विद्यालयों में यह सुविधा उपलब्ध है, तो नवोदय में क्यों नहीं। दोनों संस्थान एक ही मंत्रालय के अधीन हैं, लेकिन नीतिगत अंतर से हजारों योग्य बच्चे वंचित हो रहे। खासकर शहरी गरीब परिवारों के मेधावी छात्रों को नुकसान हो रहा है।

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कोर्ट की भूमिका और अगला कदम

जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने सुनवाई में साफ कहा कि संवैधानिक निर्देशों की अवहेलना स्वीकार्य नहीं। समिति को यह स्पष्ट करना होगा कि योजना के मूल ग्रामीण फोकस के चलते EWS quota क्यों नजरअंदाज किया जा रहा। अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। केंद्र का जवाब तय करेगा कि क्या आगामी सत्र 2026-27 से प्रवेश नियमों में व्यापक परिवर्तन होंगे।

शिक्षा क्षेत्र पर प्रभाव

यह मुद्दा इसलिए संवेदनशील है क्योंकि नवोदय ग्रामीण भारत की शैक्षिक धरोहर है। आरक्षण लागू होने से ग्रामीण-शहरी संतुलन मजबूत होगा और अधिक बच्चे लाभान्वित होंगे। अभिभावक संगठन इसे सकारात्मक मान रहे, हालांकि कुछ का डर है कि इससे ग्रामीण quota प्रभावित न हो। शिक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि कोर्ट के हस्तक्षेप से नीतियां और समावेशी बनेंगी। फिलहाल लाखों अभिभावक और छात्र अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। यह बदलाव नवोदय को नई दिशा दे सकता है।

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info@nitap.in

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